मध्यप्रदेश

Madhya Pradesh Maoist Women Force : मप्र में माओवादियों से लोहा लेने को तैयार ‘वीरांगनाएं’ – विशेष दस्ते में भर्ती हुईं 200 से अधिक महिलाएं

Madhya Pradesh Maoist Women Force : मध्य प्रदेश के माओवादी प्रभावित इलाकों में अब महिलाएं भी बंदूक थामकर शांति की पहरेदार बन रही हैं। प्रदेश के बालाघाट, मंडला और डिंडौरी जिलों में 200 से अधिक ग्रामीण महिलाओं ने स्वेच्छा से विशेष सहयोगी दस्ता (SSU) में शामिल होकर माओवादियों से मुकाबला करने की जिम्मेदारी संभाली है।

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यह दस्ता न केवल गश्त और खुफिया सूचना संकलन का काम करेगा, बल्कि कानून-व्यवस्था, गार्ड ड्यूटी और थानों में रिजर्व बल के रूप में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इन महिलाओं को आधुनिक हथियारों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है ताकि वे किसी भी आपात स्थिति में पुलिस का सक्रिय सहयोग कर सकें।

जानकारी के मुताबिक, तीनों जिलों में एसएसयू के लिए स्वीकृत 850 पदों में से अब तक 688 नियुक्तियाँ पूरी हो चुकी हैं, जिनमें बालाघाट की 170 महिलाएं शामिल हैं। प्रशिक्षण का कार्य इन दिनों ज़ोरों पर है और 15 जनवरी से पहले इनकी पदस्थापना (Madhya Pradesh Maoist Women Force) की जाएगी। सभी सहयोगियों को 25 हजार रुपये मासिक मानदेय दिया जाएगा। पहले एक वर्ष के अनुबंध के बाद, संतोषजनक सेवा पर इसे पाँच वर्ष तक बढ़ाया जा सकेगा।

एक स्थानीय महिला सदस्य ने कहा, “पहले डर लगता था, अब हथियार थामकर अपने गांव की रक्षा करने का गर्व महसूस होता है।” यह जज़्बा ही इस अभियान को एक नई दिशा दे रहा है।

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केंद्र सरकार ने पहले ही माओवाद समाप्त करने की समयसीमा 31 मार्च 2025 तय की है। प्रदेश में इस समय लगभग 60 माओवादी सक्रिय बताए जा रहे हैं। इन महिलाओं की भागीदारी से राज्य पुलिस का मनोबल बढ़ा है और स्थानीय स्तर पर खुफिया नेटवर्क और जनसहयोग (Madhya Pradesh Maoist Women Force) मजबूत हो रहा है।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह पहल न केवल सुरक्षा दृष्टि से अहम है, बल्कि महिलाओं के सशक्तिकरण और ग्रामीण आत्मनिर्भरता की दिशा में भी बड़ी छलांग साबित होगी।

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