संपादकीय: वक्फ बिल को लेकर घमासान

Controversy over the Wakf Bill
Controversy over the Wakf Bill: सरकार द्वारा वक्फ बिल संसोधन विधेयक को लेकर देशभर में चर्चा चल रही है। वक्फ बिल का अनेक मुस्लिम संगठनों ने विरोध किया है। जगह जगह इस बिल को रोकने के लिए शांतिपूर्ण तरीके से विरोध प्रदर्शन भी हुआ है। इधर सरकार ने दावा किया है कि वक्फ बिल से अल्पसंख्यकों के साथ कोई बेइंसाफी नहीं होने वाली है। संसद के इसी सत्र में वक्फ बिल पेश करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इस बारे में संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजु ने कहा है कि वक्फ बिल पर सरकार खुले मन से चर्चा करने के लिए तैयार है।
उन्होंने कहा है कि वक्फ बिल का विरोध ऐसे शक्तिशाली लोग कर रहे हैं जिन्होंने वक्फ की संपतियों पर कब्जा कर रखा है। और ऐसे ही लोग लोगों को गुमराह कर रहे हैं तथा वक्फा बिल को असंवैधानिक करार दे रहे हैं। जबकि इस बिल से गरीब और पिछड़े मुसलमानों के बच्चों और महिलाओं को लाभ होगा। संसदीय कार्यमंत्री ने विपक्षी पार्टियों पर भी निशाना साधा है और कहा है कि उन्हें किसी भी बात पर सरकार की अलोचना करने का अधिकार है लेकिन इसका भी कोई आधार होना चाहिए। केन्द्र सरकार यह बिल मुसलमानों के हित में ही ला रही है।
यही वजह है कि धार्मिक प्रतिबद्धता और मान्यता से परे होकर कई मुस्लिम संगठन इस विधेयक का समर्थन कर रहे हैं। सरकार ने इस विधेयक पर अब तक इस बिल पर सबसे से व्यापक परामर्श कराया है और सर्वोच्च प्रतिनिधित्व का भी कीर्तिमान बनाया है इसलिए सरकार ने सभी विपक्षी पार्टियों से गुजारिश की है कि वे इस बिल पर संसद में सार्थक चर्चा करें। केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी कहा है कि केन्द्र सरकार संविधान के दायरे में रहकर भी वक्फ अधिनियम में संशोधन करने जा रही है। प्रस्तावित कानून से किसी को भी डरने की जरूरत नहीं है।
विपक्षी पार्टियां मुस्लमानों को गुमराह कर रही हैं। जबकि यह मुस्लिमों के हित में है। संभवत: दो अप्रैल को ही यह बिल सदन में पेश किया जाएगा और इस पर सरकार यह कोशिश करेगी कि इस बिल को लेकर विपक्षी पार्टियों की जो संकायें हैं उसे दूर किया जाये और इस बिल पर सर्वसम्मति बनाई जाये। किन्तु इस बिल के खिलाफ कुछ विपक्षी पार्टियों ने पूरे देश में जैसा माहौल बना रखा है उसे देखते हुए वक्फ बिल पर चर्चा के दौरान विपक्ष द्वारा भारी हंगामा हो सकता है। गौरतलब है कि अस्सद्दुन आवैसी ने वक्फ बिल को लेकर मोर्चा खोल रखा है।
वे लगातार वक्फ बिल का विरोध कर रहे हैं और इस बिल को असंवैधानिक करार दे रहे हैं। अब तो उन्होंने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और आंध्रप्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू को भी चुनौती दे दी है। ओवैसी ने कहा है कि एनडीए में शामिल नीतीश कुमार, चंद्रबाबू नायडू और चिराग पासवान यदि मुसलमानों के सच्चे हितैषी हैं तो उन्हें केन्द्र सरका पर दबाव बनाना चाहिए और संसद में वक्फ बोर्ड संशोधन विधेयक को रोकना चाहिए यदि वे ऐसा नहीं करते मुस्लिम समुदाय इन नेताओं को उनके विश्वासघात के लिए कतई माफ नहीं करेगा।
ओवैसी के इस विरोध के कारण संसद में इस बिल पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तिखी तकरार होना लाजमी है। दरअसल छह माह बाद बिहार विधानसभा के चुनाव होने जा रहे हैं। यही वजह है कि वक्फ बिल को लेकर औवैसी सहित अन्य विपक्षी पार्टियों के नेता वक्फ बिल पर सियासत कर रहे हैं और उनके बीच मुस्लिमों का सबसे बड़ा हितैषी बनने की होड़ लगी हुई है। बहरहाल सरकार को चाहिए कि वह वक्फ बिल को लेकर विपक्ष की शंकाओं का समाधान करे और इस बिल पर सर्वसम्मति कायम करने की हर संभव कोशिश करे।