CM Hemant Soren Decision : झारखंड में सड़क हादसे पर अब मिलेंगे 4 लाख, सीएम ने मुआवजे की राशि 4 गुना बढ़ाई

झारखंड की सड़कों पर होने वाले हादसों में जान गंवाने वालों के परिवारों के लिए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने एक बेहद संवेदनशील और बड़ा फैसला लिया है। अब तक सड़क दुर्घटना में मौत होने पर परिजनों को जो मामूली मदद मिलती थी, उसे सरकार ने सीधे चार गुना बढ़ा दिया है।

इस फैसले के पीछे मुख्यमंत्री की मंशा साफ है कि दुख की इस घड़ी में गरीब परिवारों को कम से कम आर्थिक तंगी का सामना न करना पड़े। झारखंड मंत्रालय में हुई इस हाई-लेवल बैठक के बाद अब पूरे प्रदेश में आपदा राहत के नियमों को और भी ज्यादा मानवीय और सरल बना दिया गया है।

इस बैठक में सिर्फ पैसों की बात नहीं हुई बल्कि उस सिस्टम को भी बदलने पर जोर दिया गया जो मुआवजे के नाम पर लोगों को दफ्तरों के चक्कर कटवाता था। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि सत्यापन की प्रक्रिया में पारदर्शिता तो रहे, लेकिन किसी भी आश्रित को मदद के लिए महीनों इंतजार न करना पड़े।

यहां गांव से लेकर शहर तक के उन युवाओं को भी बड़ी जिम्मेदारी देने की तैयारी है जो ‘आपदा मित्र’ के रूप में अपनी सेवाएं देते हैं। सरकार का यह कदम साबित करता है कि झारखंड अब तकनीक और मानवीय संवेदनाओं को जोड़कर आपदा प्रबंधन का नया मॉडल तैयार कर रहा है।

मुआवजे की राशि में चार गुना की बड़ी बढ़ोतरी

बैठक का सबसे बड़ा और राहत भरा फैसला सड़क दुर्घटनाओं में जान गंवाने वाले लोगों के परिजनों के लिए लिया गया है। मुख्यमंत्री ने सड़क हादसे में मृत व्यक्तियों के आश्रितों को दी जाने वाली अनुग्रह अनुदान राशि में चार गुना बढ़ोतरी करने का निर्णय लिया है। अब सड़क दुर्घटना में मौत होने पर मृतक के परिवार को 4 लाख रुपये की सहायता राशि दी जाएगी जो पहले मात्र 1 लाख रुपये थी। इसे विशिष्ट स्थानीय आपदा की श्रेणी में रखते हुए अन्य चिन्हित आपदाओं के समान कर दिया गया है।

डीसी करेंगे सीधा भुगतान, प्रक्रिया हुई बेहद आसान

सरकार ने अनुदान राशि मिलने में होने वाली देरी और जटिलताओं को खत्म करने के लिए प्रक्रिया को आसान बनाने पर सहमति दी है। अब मृतक के आश्रितों को उनके गृह जिले के उपायुक्त (DC) द्वारा घटना के सत्यापन के बाद सीधे राशि प्रदान कर दी जाएगी। हालांकि, पारदर्शिता बनाए रखने के लिए यह तय किया गया है कि सत्यापन कार्य अनिवार्य होगा। साथ ही यह स्पष्ट किया गया है कि यदि कोई व्यक्ति सरकारी बीमा योजना के तहत कवर है, तो वह या तो आपदा प्रबंधन का अनुदान ले सकेगा या बीमा की राशि।

युवाओं और गोताखोरों की बनेगी डिजिटल टीम

राज्य के चार जिलों दुमका, गोड्डा, पाकुड़ और साहिबगंज में चल रही युवा आपदा मित्र स्कीम को और प्रभावी बनाने का निर्णय लिया गया है। मुख्यमंत्री ने इन स्वयंसेवकों का एक डिजिटल डेटाबेस तैयार करने और उसे इमरजेंसी रिस्पांस सपोर्ट सिस्टम से जोड़ने का निर्देश दिया है। इसके अलावा, पानी में डूबने से होने वाली मौतों को रोकने के लिए गोताखोरों की संख्या बढ़ाई जाएगी। मुख्यमंत्री ने इसमें पुलिस जवानों व होमगार्ड्स के साथ-साथ महिलाओं को भी शामिल कर एक विस्तृत कार्य योजना बनाने का निर्देश दिया है।

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