सरायकेला-खरसावां के चांडिल-टाटा रेल सेक्शन में ट्रेनों की लगातार हो रही लेट-लतीफी का मुद्दा अब गंभीर रूप ले चुका है। इस पर झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने खुलकर नाराजगी (Chandil Tatanagar Rail Section) जताई है।
उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर सीधे रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव को संबोधित करते हुए इस स्थिति को पूरी तरह ‘अस्वीकार्य’ बताया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले दो वर्षों से इस अहम रेल खंड पर यात्री ट्रेनें लगातार घंटों देरी से चल रही हैं, जिससे आम लोगों की दिनचर्या बुरी तरह प्रभावित हो रही है।
मालगाड़ियों को प्राथमिकता, यात्रियों की अनदेखी का आरोप (Chandil Tatanagar Rail Section)
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने रेलवे की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि एक ही ट्रैक पर यात्री ट्रेनों को घंटों रोका जाता है, जबकि मालगाड़ियों की आवाजाही बिना रुकावट जारी रहती है। उन्होंने तीखे अंदाज में पूछा कि क्या झारखंड के लोगों का समय रेलवे के लिए महत्वहीन है, जबकि माल परिवहन को प्राथमिकता दी जा रही है।
श्रमिकों, छात्रों और नौकरीपेशा वर्ग पर असर (Chandil Tatanagar Rail Section)
ट्रेनों की देरी का सबसे ज्यादा असर रोजाना यात्रा करने वाले श्रमिकों, छात्रों और नौकरीपेशा लोगों पर पड़ रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सिर्फ तकनीकी या परिचालन की समस्या नहीं, बल्कि आम नागरिकों की सुविधा और सम्मान से जुड़ा मुद्दा है। लगातार देरी के कारण हजारों यात्रियों को स्टेशन पर घंटों इंतजार करना पड़ता है, जिससे उनके काम और पढ़ाई दोनों प्रभावित हो रहे हैं।
रेल मंत्री से तत्काल समाधान की मांग
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव से चांडिल-टाटा सेक्शन में यात्री ट्रेनों को प्राथमिकता (Chandil Tatanagar Rail Section) देने की मांग की है। साथ ही क्षेत्र में लंबित रेलवे परियोजनाओं को तय समयसीमा में पूरा करने का आग्रह किया है। उन्होंने साफ कहा कि झारखंड के नागरिकों की सुविधा के साथ कोई समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा और इस समस्या का स्थायी समाधान जल्द सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
