Shaurya Chakra : छत्तीसगढ़ के तीन वीरों का बढ़ा मान, अदम्य साहस के लिए मिलेगा देश का बड़ा सम्मान

छत्तीसगढ़ के लिए आज गर्व का दिन है। राज्य के तीन बहादुर जवानों को उनके साहस, कर्तव्यनिष्ठा और वीरता के लिए देश के प्रतिष्ठित सम्मान से नवाजा जाएगा। इस खबर के सामने आते ही उनके गृह क्षेत्रों में खुशी (Shaurya Chakra) का माहौल है और लोगों में गर्व की भावना देखने को मिल रही है।
सुरक्षा और शांति के लिए जोखिम भरे हालात में डटकर मुकाबला करने वाले इन जवानों की बहादुरी अब राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित होने जा रही है। उनके साहसिक कार्यों को देशभर में सराहा जा रहा है।
राष्ट्रपति के हाथों मिलेगा सम्मान : Shaurya Chakra
नई दिल्ली में आयोजित समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू छत्तीसगढ़ के तीन जवानों को शौर्य चक्र से सम्मानित करेंगी। यह सम्मान असाधारण साहस और वीरता का परिचय देने वाले सुरक्षा कर्मियों को प्रदान किया जाता है। सम्मान पाने वालों में असम राइफल्स के जवान भोजराम साहू के साथ पुलिस निरीक्षक लक्ष्मण केवट और निरीक्षक रामेश्वर देशमुख शामिल हैं।
मणिपुर में दिखाई थी बहादुरी
असम राइफल्स में पदस्थ भोजराम साहू ने मणिपुर में आतंकियों के खिलाफ अभियान के दौरान अदम्य साहस का परिचय दिया था। नवंबर 2024 में आतंकियों की मौजूदगी की सूचना मिलने के बाद सुरक्षा बलों और आतंकियों के बीच मुठभेड़ हुई थी।
मुठभेड़ के दौरान गोली लगने के बावजूद उन्होंने मोर्चा नहीं छोड़ा और जवाबी कार्रवाई जारी रखी। इस अभियान में आतंकियों को भारी नुकसान उठाना पड़ा और सुरक्षा बलों को सफलता मिली।
नक्सल मोर्चे के जांबाज अधिकारी
छत्तीसगढ़ में नक्सल विरोधी अभियानों के दौरान महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले निरीक्षक लक्ष्मण केवट और निरीक्षक रामेश्वर देशमुख को भी इस सम्मान के लिए चुना गया है। दोनों अधिकारियों ने वर्षों तक दुर्गम इलाकों में अभियान चलाते हुए सुरक्षा बलों का नेतृत्व किया और कई सफल कार्रवाइयों में अहम भूमिका निभाई।
बड़े अभियानों में निभाई जिम्मेदारी
पुलिस विभाग में दोनों अधिकारियों की पहचान नक्सल विरोधी अभियानों के विशेषज्ञ अधिकारियों के रूप में की जाती है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार लक्ष्मण केवट अनेक सफल अभियानों का हिस्सा (Shaurya Chakra) रहे हैं, जबकि रामेश्वर देशमुख ने भी कई महत्वपूर्ण कार्रवाइयों में उल्लेखनीय योगदान दिया है।
ऐतिहासिक अभियान से मिली पहचान
अप्रैल 2024 में कांकेर जिले के जंगलों में चलाए गए बड़े सुरक्षा अभियान में दोनों अधिकारियों ने अग्रिम मोर्चे पर रहकर जवानों का नेतृत्व किया था। इस अभियान को राज्य के सबसे सफल अभियानों में गिना जाता है। कार्रवाई के दौरान सुरक्षा बलों ने बड़ी सफलता हासिल की थी, जिससे नक्सल विरोधी अभियान को नई मजबूती मिली।
पहले भी मिल चुके हैं सम्मान
दोनों अधिकारियों को इससे पहले भी उनकी उत्कृष्ट सेवाओं और वीरता के लिए कई राष्ट्रीय और सुरक्षा बलों के सम्मान प्राप्त हो चुके हैं। अब शौर्य चक्र मिलने से उनके नाम एक और प्रतिष्ठित उपलब्धि जुड़ गई है।
शांति स्थापित करना है सबसे बड़ा लक्ष्य
सम्मान की घोषणा पर प्रतिक्रिया देते हुए लक्ष्मण केवट ने कहा कि उनका उद्देश्य केवल अभियान चलाना नहीं बल्कि प्रभावित क्षेत्रों में शांति स्थापित करना और लोगों का विश्वास मजबूत करना (Shaurya Chakra) है। उन्होंने कहा कि सुरक्षा अभियानों की सफलता के साथ क्षेत्र में सामान्य स्थिति बहाल करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
पुलिस विभाग के लिए गौरव का क्षण
पुलिस अधीक्षक निखिल आकाश राखेचा ने इसे पूरे छत्तीसगढ़ पुलिस परिवार के लिए गौरवपूर्ण क्षण बताया। उन्होंने कहा कि यह सम्मान सुरक्षा बलों और पुलिस अधिकारियों के मनोबल को और मजबूत करेगा तथा आने वाली पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगा।



