छत्तीसगढ़

DMF Scam : डीएमएफ घोटाले में बड़ा झटका, कारोबारी की जमानत याचिका हाई कोर्ट ने ठुकराई

बिलासपुर में चर्चित डीएमएफ घोटाले को लेकर एक बार फिर मामला सुर्खियों (DMF Scam) में आ गया है। हाई कोर्ट के फैसले के बाद प्रशासनिक और कारोबारी हलकों में इस मामले को लेकर चर्चा तेज हो गई है। लंबे समय से चल रही जांच के बीच अदालत की सख्त टिप्पणी ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है।

जांच एजेंसियां लगातार इस घोटाले से जुड़े अलग अलग पहलुओं की जांच कर रही हैं। अदालत में हुई सुनवाई के दौरान आर्थिक अपराध और कमीशन नेटवर्क को लेकर कई अहम बातें सामने आईं। फैसले के बाद अब इस मामले में आगे की कार्रवाई पर भी नजर बनी हुई है।

कारोबारी की जमानत याचिका खारिज : DMF Scam

छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने डीएमएफ घोटाले के आरोपी कारोबारी सतपाल सिंह छाबड़ा की नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी है। अदालत ने कहा कि आर्थिक अपराध गंभीर प्रकृति के होते हैं और इनका असर सीधे देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। कोर्ट ने यह भी माना कि मामले की जांच अभी जारी है और ऐसे में आरोपी की कस्टडी जरूरी है।

जांच एजेंसियों ने लगाए गंभीर आरोप

एसीबी और ईओडब्ल्यू ने सतपाल सिंह छाबड़ा को डीएमएफ से जुड़े कथित घोटाले और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार किया था। जांच एजेंसियों के अनुसार आरोपी ने खरीदी और आपूर्ति से जुड़ी अनियमितताओं में मुख्य बिचौलिया और कमीशन एजेंट की भूमिका निभाई।

पूर्व अधिकारी के प्रभाव का आरोप

जांच के दौरान यह बात भी सामने आई कि वर्ष 2019 से आरोपी कृषि विभाग से जुड़े आपूर्ति कार्यों में सक्रिय था। एजेंसियों के मुताबिक उसे मंदीप चावला उर्फ मैडी ने संपर्क (DMF Scam) किया था। जांच में दावा किया गया कि पूर्व आईएएस अनिल टुटेजा के प्रभाव का इस्तेमाल कर विभागीय काम दिलाने की बात कही गई थी।

विक्रेताओं से लिया जाता था कमीशन

जांच एजेंसियों के अनुसार आरोपी रेट कांट्रैक्ट वाले विक्रेताओं को कृषि और बागवानी विभागों से जोड़ने का काम करता था। आरोप है कि आपूर्ति आदेश दिलाने के बदले विक्रेताओं से 30 से 35 प्रतिशत तक कमीशन लिया जाता था। इसमें कुछ हिस्सा ऊपर भेजे जाने और बाकी रकम आपस में बांटने की बात भी जांच में सामने आई है।

हाई कोर्ट की सख्त टिप्पणी

सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने कहा कि आर्थिक अपराध जानबूझकर व्यक्तिगत लाभ के लिए (DMF Scam) किए जाते हैं और इनसे समाज तथा देशहित दोनों प्रभावित होते हैं। अदालत ने माना कि ऐसे मामलों को सामान्य अपराध की तरह नहीं देखा जा सकता और जांच पूरी होने तक कड़ी निगरानी जरूरी है।

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