China Taiwan Conflict 2026 : अमेरिका-ईरान जंग के बीच बीजिंग का मास्टरस्ट्रोक, ताइवान पर चीन ने चली ‘ट्रंप वाली चाल’, विपक्ष के जरिए घेरी सत्ता

दुनिया की नजरें इस समय मिडिल ईस्ट में अमेरिका और ईरान के बीच छिड़े भीषण युद्ध (China Taiwan Conflict 2026) पर टिकी हैं, लेकिन इसी बीच ड्रैगन ने ताइवान जलडमरूमध्य में एक ऐसा राजनीतिक खेला कर दिया है जिसने वाशिंगटन की चिंताएं बढ़ा दी हैं। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने ताइवान की मुख्य विपक्षी पार्टी कुओमिनतांग (KMT) की अध्यक्ष चेंग ली-वुन के साथ बीजिंग में एक हाई-प्रोफाइल मुलाकात की है।
इस कदम को रणनीतिक विशेषज्ञ ठीक वैसी ही चाल मान रहे हैं जैसी अमेरिका अक्सर दूसरे देशों की सत्ता पलटने के लिए चलता आया हैयानी वर्तमान सरकार से टकराव होने पर विपक्ष के नेता को अपने पाले में खड़ा करना। जब ट्रंप प्रशासन ईरान के मोर्चे पर व्यस्त है, तब चीन ने ताइवान की राजनीति में सीधे सेंधमारी कर अपनी कूटनीतिक जीत का ऐलान कर दिया है।
‘शांति की यात्रा’ या बीजिंग का परोक्ष समर्थन? जिनपिंग ने फिर दोहराया एकीकरण का संकल्प (China Taiwan Conflict 2026)
ताइवान की विपक्षी नेता चेंग ली-वुन पिछले एक दशक में चीन की यात्रा करने वाली पहली प्रमुख राजनेता बनी हैं। बीजिंग के ‘ग्रेट हॉल ऑफ द पीपल’ में हुई इस मुलाकात के दौरान शी जिनपिंग ने बेहद सधे हुए शब्दों में कहा कि ताइवान जलडमरूमध्य के दोनों ओर रहने वाले लोग अंततः एक-दूसरे के करीब आएंगे और यह ‘ऐतिहासिक अनिवार्यता’ है जिसे कोई बदल नहीं सकता।
दरअसल, ताइवान की मौजूदा सरकार चीन के दावों को सिरे से खारिज करती रही है, लेकिन विपक्षी दल KMT का रुख चीन के प्रति थोड़ा लचीला रहा है। चेंग ली ने अपनी इस छह दिवसीय यात्रा को “शांति की यात्रा” करार दिया और शंघाई से लेकर नानजिंग तक युद्ध रोकने के लिए एक संस्थागत समाधान तलाशने की वकालत की।
ट्रंप के दौरे से पहले बड़ा संदेश, ताइवान के बहाने अमेरिका को चीन की चुनौती (China Taiwan Conflict 2026)
यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है जब अगले महीने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का चीन दौरा प्रस्तावित है। जानकार मान रहे हैं कि चीन ने चेंग ली-वुन के साथ बैठक कर यह संदेश दे दिया है कि ताइवान के भीतर भी एक बड़ा तबका बीजिंग के साथ संवाद का इच्छुक है।
चेंग ने बैठक में स्पष्ट कहा कि दोनों पक्षों को राजनीतिक टकराव से ऊपर उठकर एक साझा समुदाय बनाना चाहिए। एक तरफ जहां अमेरिका अपनी सैन्य ताकत का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ कर रहा है, वहीं चीन ने ताइवान में बिना एक भी गोली चलाए ‘सॉफ्ट पावर’ और विपक्षी कार्ड के जरिए अपनी स्थिति मजबूत कर ली है। अब देखना यह होगा कि युद्ध के मोर्चे से फुर्सत मिलने के बाद अमेरिका इस ‘ताइवान खेला’ पर क्या प्रतिक्रिया देता है।



