छत्तीसगढ़

Catch the Rain के समापन सत्र की प्रस्तुति करेगा छत्तीसगढ़, पीएम की मौजूदगी में सीएम रखेंगे जल-विमर्श का समाहार

रायपुर/नई दिल्ली। नई दिल्ली में केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय द्वारा आयोजित विभागीय शिखर सम्मेलन में छत्तीसगढ़ को दोहरी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिली है। देशभर के राज्यों के जल संसाधन मंत्रियों और सचिवों की मौजूदगी में होने वाले राष्ट्रीय सम्मेलन में थीम-2 ‘ Catch the Rain-जल संचय जनभागीदारी’ के राष्ट्रीय सत्र के समापन की प्रस्तुति छत्तीसगढ़ करेगा।

 सम्मेलन के दूसरे दिन प्रदेश की ओर से 30 मिनट की समापन प्रस्तुति दी जाएगी। इसमें छत्तीसगढ़ की जल संचय कार्य-संस्कृति, नवाचार और जनभागीदारी के मॉडल को राष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत किया जाएगा। समापन सत्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ‘कैच द रेन’ अभियान से जुड़े विचार-विमर्श का समाहार प्रस्तुत करेंगे। साथ ही थीम-2 के सर्वसम्मत और समयबद्ध कार्य-बिंदु प्रधानमंत्री तथा विभिन्न राज्यों से आए मंत्रियों और सचिवों के समक्ष रखेंगे।

जल संरक्षण में छत्तीसगढ़ की अहम भागीदारी

प्रधानमंत्री के ‘जल जहां गिरे, जब गिरे-वहीं संचय करें’ के आह्वान से शुरू हुआ Catch the Rain अभियान अब जन-नेतृत्व वाले जल संरक्षण आंदोलन का रूप ले चुका है। अभियान के पहले चरण में 10 लाख के लक्ष्य के मुकाबले 27.6 लाख संरचनाएं बनीं, जबकि दूसरे चरण में एक करोड़ के लक्ष्य के विरुद्ध 1.5 करोड़ से अधिक जल संरक्षण संरचनाएं दर्ज की गईं। अब 31 मई 2027 तक दो करोड़ नई जल संरक्षण संरचनाएं बनाने का राष्ट्रीय लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

छत्तीसगढ़ के मॉडल को राष्ट्रीय पहचान

राष्ट्रीय अभियान में छत्तीसगढ़ भी अग्रणी राज्यों में शामिल है। जेएसजेबी 2.0 के तहत प्रदेश में 24.07 लाख से अधिक जल संरक्षण संरचनाएं दर्ज की गई हैं। कोरिया जिले से शुरू हुआ छत्तीसगढ़ का ‘5 प्रतिशत मॉडल’ भी जल शक्ति मंत्रालय के राष्ट्रीय दस्तावेज में स्थान पा चुका है। इस मॉडल में किसान स्वेच्छा से अपनी भूमि का पांच प्रतिशत हिस्सा जल पुनर्भरण संरचनाओं के लिए समर्पित करते हैं। वहीं ‘मोर गांव, मोर पानी’ जैसे अभियानों ने पंचायत स्तर पर जल योजना को जनभागीदारी से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

 मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा है कि राष्ट्रीय मंच पर मिली यह जिम्मेदारी छत्तीसगढ़ के उन सभी लोगों का सम्मान है, जिन्होंने अपने गांवों में पानी रोकने के लिए योगदान दिया है। प्रदेश के किसानों, महिलाओं और युवाओं ने प्रधानमंत्री के ‘कैच द रेन’ आह्वान को जनआंदोलन में बदलने का काम किया है और राष्ट्रीय मंच पर छत्तीसगढ़ उन्हीं की आवाज लेकर जा रहा है।

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