Chhattisgarh Republic Day Tableau : कर्तव्य पथ पर गूंजेगा जनजातीय स्वाभिमान, छत्तीसगढ़ की झांकी सुनाएगी वीरता की अमर कथा
Chhattisgarh Republic Day Tableau
गणतंत्र दिवस की भव्य परेड में इस बार इतिहास सिर्फ देखा नहीं जाएगा, बल्कि महसूस किया जाएगा। कर्तव्य पथ पर निकलने वाली एक झांकी ऐसी होगी, जो देशवासियों को आज़ादी की लड़ाई के उन अध्यायों से जोड़ देगी, जिन्हें समय ने कभी धुंधला नहीं होने दिया।
देश की राजधानी नई दिल्ली स्थित कर्तव्य पथ पर गणतंत्र दिवस 2026 के अवसर पर छत्तीसगढ़ की झांकी विशेष आकर्षण का केंद्र बनने (Chhattisgarh Republic Day Tableau) जा रही है। “स्वतंत्रता का मंत्र – वंदे मातरम्” थीम पर आधारित यह झांकी देश के पहले जनजातीय डिजिटल संग्रहालय की अवधारणा और उसकी गौरवगाथा को जीवंत रूप में प्रस्तुत करेगी। इस झांकी के माध्यम से जनजातीय स्वतंत्रता सेनानियों के अद्वितीय बलिदान और संघर्ष को भावपूर्ण तरीके से दर्शाया गया है।
रक्षा मंत्रालय द्वारा राष्ट्रीय रंगशाला कैंप में आयोजित प्रेस प्रीव्यू के दौरान राष्ट्रीय मीडिया के समक्ष छत्तीसगढ़ की झांकी का भव्य प्रदर्शन किया गया। झांकी उन अमर जनजातीय वीरों को समर्पित है, जिन्होंने ब्रिटिश शासन के दमनकारी कानूनों के विरुद्ध संघर्ष करते हुए स्वतंत्रता की लौ को जलाए रखा।
इन जनजातीय नायकों की स्मृति को सहेजने के लिए नवा रायपुर अटल नगर में देश का पहला जनजातीय डिजिटल संग्रहालय स्थापित किया गया है। इस संग्रहालय में छत्तीसगढ़ सहित देश के 14 प्रमुख जनजातीय स्वतंत्रता आंदोलनों को अत्याधुनिक डिजिटल तकनीक के माध्यम से संरक्षित (Chhattisgarh Republic Day Tableau) किया गया है। इस ऐतिहासिक संग्रहालय का लोकार्पण नरेंद्र मोदी द्वारा छत्तीसगढ़ राज्य गठन की रजत जयंती के अवसर पर किया गया था।
विशेषज्ञ समिति से अंतिम स्वीकृति मिलने के बाद जनसंपर्क विभाग के अधिकारियों और कलाकारों ने बीते एक माह से लगातार परिश्रम कर झांकी को अंतिम स्वरूप दिया है। उल्लेखनीय है कि इस वर्ष गणतंत्र दिवस परेड में देशभर से 17 राज्यों की झांकियों का चयन किया गया है, जिनमें छत्तीसगढ़ की झांकी को विशेष स्थान मिला है।
झांकी के अग्र भाग में वर्ष 1910 के ऐतिहासिक भूमकाल विद्रोह के महानायक वीर गुंडाधुर को दर्शाया गया है। धुर्वा समाज के इस वीर ने अन्याय के विरुद्ध जनजातीय समाज को संगठित (Chhattisgarh Republic Day Tableau) किया। आम की टहनियां और सूखी मिर्च, जो भूमकाल विद्रोह के प्रतीक थे, झांकी में विशेष रूप से उकेरे गए हैं। विद्रोह की व्यापकता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि अंग्रेजों को नागपुर से सेना बुलानी पड़ी, फिर भी वे वीर गुंडाधुर को पकड़ नहीं सके।
झांकी के पृष्ठ भाग में छत्तीसगढ़ के प्रथम शहीद वीर नारायण सिंह को घोड़े पर सवार, हाथ में तलवार लिए दर्शाया गया है। अकाल के समय गरीबों और वंचितों के हित में संघर्ष करने वाले वीर नारायण सिंह ने 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। पूरी झांकी जनजातीय समाज के अदम्य साहस, देशभक्ति और स्वतंत्रता के प्रति अटूट संकल्प को प्रभावशाली ढंग से अभिव्यक्त करती है।
