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Chhattisgarh Paper Leak : विधानसभा में पेपर लीक को लेकर तीखी बहस, मंत्री बोले- आधी रात को सवाल वायरल किए गए

छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र में 12वीं बोर्ड के हिंदी पेपर को लेकर विवाद (Chhattisgarh Paper Leak) गूंज उठा। विपक्ष ने इस मुद्दे को सदन में उठाते हुए राज्य की स्कूली शिक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े किए, जबकि सरकार की ओर से पेपर लीक की बात से साफ इनकार किया गया। इस पूरे मामले ने परीक्षा व्यवस्था, गोपनीयता और शिक्षा तंत्र की निगरानी को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

कांग्रेस विधायक देवेंद्र यादव ने सदन के भीतर इस मुद्दे को गंभीर बताते हुए कहा कि प्रदेश की स्कूली शिक्षा व्यवस्था पहले से सवालों के घेरे में है, और अब 12वीं हिंदी पेपर लीक होने की चर्चा ने स्थिति को और चिंताजनक बना दिया है। उनका कहना था कि अगर परीक्षा से जुड़े सवाल पहले से बाहर आए हैं, तो यह केवल एक संयोग नहीं माना जा सकता। उन्होंने आरोप लगाया कि पेपर लीक कर कुछ लोगों और कुछ छात्रों को अनुचित फायदा पहुंचाने की कोशिश की गई है।

देवेंद्र यादव ने यह भी आशंका जताई कि मामला केवल एक विषय तक सीमित नहीं हो सकता। उनके मुताबिक, जो सूचनाएं सामने आ रही हैं, वे दूसरे विषयों के पेपर को लेकर भी संदेह पैदा (Chhattisgarh Paper Leak) करती हैं। ऐसे में उन्होंने सरकार से मांग की कि मामले में तत्काल एफआईआर दर्ज कराई जाए, निष्पक्ष जांच हो और जो भी दोषी हों, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। विपक्ष का जोर इस बात पर रहा कि परीक्षा प्रणाली पर भरोसा बनाए रखने के लिए सरकार को पारदर्शी और तेज कार्रवाई करनी चाहिए।

वहीं, स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने सदन और बाद में बातचीत के दौरान पेपर लीक के आरोपों को खारिज किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश में कहीं भी 12वीं बोर्ड का पेपर लीक नहीं हुआ है। मंत्री के मुताबिक, एक छात्र संगठन ने आधी रात को कुछ प्रश्नों को जानबूझकर व्हाट्सएप ग्रुप में वायरल किया, जिससे भ्रम की स्थिति बनी। उन्होंने यह भी कहा कि इस पूरे मामले की जांच के लिए माध्यमिक शिक्षा मंडल को निर्देश दे दिए गए हैं।

मंत्री ने साफ किया कि जांच में यदि किसी तरह की गड़बड़ी, लापरवाही या दोषी व्यक्ति सामने आता है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई (Chhattisgarh Paper Leak) की जाएगी। सरकार की ओर से फिलहाल यही रुख सामने आया है कि इसे सीधे पेपर लीक कहना जल्दबाजी होगी और जांच रिपोर्ट के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी। दूसरी तरफ विपक्ष इस तर्क से संतुष्ट नजर नहीं आ रहा और इसे शिक्षा व्यवस्था की गंभीर चूक के रूप में पेश कर रहा है।

सदन में उठा यह मामला केवल एक परीक्षा विवाद तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उस भरोसे से जुड़ा है जो छात्र, अभिभावक और शिक्षक बोर्ड परीक्षाओं पर करते हैं। अगर परीक्षा से पहले या परीक्षा के दौरान सवाल वायरल होने की बात सामने आती है, तो इससे पूरे सिस्टम की विश्वसनीयता पर असर पड़ता है। अब देखना होगा कि जांच में क्या सामने आता है और क्या सरकार विपक्ष की मांग के मुताबिक इस मामले में और कड़ा रुख अपनाती है।

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