रायपुर में पंचायतों की कार्यप्रणाली को लेकर नई चर्चा शुरू (Chhattisgarh Panchayat) हो गई है। गांवों के विकास, वित्तीय व्यवस्था और प्रशासनिक ढांचे पर सामने आई ताजा रिपोर्ट ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। रिपोर्ट के सार्वजनिक होने के बाद स्थानीय निकायों की कार्यशैली और योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर लोगों के बीच भी अलग अलग तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।
रिपोर्ट में जिन बिंदुओं का उल्लेख किया गया है, उन्होंने पंचायत व्यवस्था की मौजूदा स्थिति पर गंभीर चिंता जताई है। कर्मचारियों की कमी से लेकर वित्तीय प्रबंधन और विकास योजनाओं की निगरानी तक कई ऐसे पहलू सामने आए हैं, जिन पर सुधार की जरूरत बताई गई है।
पंचायतों में बड़ी संख्या में पद खाली Chhattisgarh Panchayat
भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक की रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश की पंचायती राज व्यवस्था में स्वीकृत पदों का बड़ा हिस्सा अब भी खाली है। रिपोर्ट में बताया गया है कि कुल स्वीकृत पदों में से करीब 61 प्रतिशत पद रिक्त हैं। इससे पंचायतों के प्रशासनिक कामकाज और योजनाओं के संचालन पर असर पड़ने की बात कही गई है।
वित्तीय प्रबंधन पर उठे सवाल
रिपोर्ट में स्थानीय निकायों के वित्तीय प्रबंधन को लेकर भी गंभीर टिप्पणियां की गई हैं। इसमें कहा गया है कि स्थानीय निकायों को मिलने वाली राशि में कमी दर्ज की गई, जिससे उन्हें लगभग 3243 करोड़ रुपये का वित्तीय नुकसान हुआ। इस पहलू को वित्तीय व्यवस्था की बड़ी चुनौती के रूप में देखा गया है।
डिजिटल व्यवस्था के बावजूद मैनुअल रिकॉर्ड Chhattisgarh Panchayat
लेखा जांच के दौरान यह भी सामने आया कि ई ग्राम स्वराज पोर्टल लागू होने के बाद भी कई पंचायतों में अब तक मैनुअल हिसाब किताब रखा जा रहा है। रिपोर्ट के अनुसार डिजिटल प्रणाली का पूरी तरह उपयोग नहीं होने से पारदर्शिता और निगरानी पर भी असर पड़ रहा है।
कई वर्षों तक नहीं हुईं जिला योजना समिति की बैठकें
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि वर्ष 2018 से 2023 के बीच जिला योजना समितियों की बैठकें आयोजित (Chhattisgarh Panchayat) नहीं की गईं। जबकि नियमों के अनुसार इन बैठकों के माध्यम से स्थानीय विकास योजनाओं की समीक्षा और भविष्य की रणनीति तय की जानी चाहिए। रिपोर्ट में इसे विकास कार्यों की निगरानी से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा बताया गया है।
