Chhattisgarh सरकार की पहल ला रही रंग, शेल्टर होम के लोग बोले- काश यहीं...

Chhattisgarh सरकार की पहल ला रही रंग, शेल्टर होम के लोग बोले- काश यहीं…

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Chhattisgarh की राजधानी रायपुर के शेल्टर होम में 13 राज्यों के 262 लोगों ने ली है शरण

रायपुर/नवप्रदेश। छत्तीसगढ़ (chhattisgarh) में लॉकडाउन (lockdown) के इस दौर में कई खबरें ऐसी भी आ रही हैं, जो दिलों दिमाग को सुकून पहुंचाती हैं और इंसानियत और मानवता के जज्बे को पुख्ता करती हैं। छत्तीसगढ़ (chhattisgarh) सरकार ने लॉकडाउन (lockdown) के दौरान गरीब, निराश्रित व अप्रवासी लोगों के लिए अनेक शेल्टर होम (shelter home raipur) विभिन्न जिलों में खोले हैं।

उन्हीं में से एक शेल्टर होम (shelter home raipur) रायपुर में भी चल रहा है, जिसे सरकार समर्थ चैरिटेबल ट्रस्ट के माध्यम से चला रही है। शेल्टर होम में इस संकट की घड़ी में 13 राज्यों के 262 गरीब व निराश्रित आश्रय पा रहे हैं और छत्तीसगढ़ (chhattisgarh) शासन को धन्यवाद दे रहे हैं। ट्रस्ट के 25 वारियर मंजित कौर बल के नेतृत्व में 30 मार्च से लेकर आज तक इन निराश्रितों की जी जान से सेवा में जुटे हुए हैं।

दोनों वक्त चाय व खाना एक टाइम नाश्ता भी

लॉकडाउन (lockdown) के दौरान शेल्टर होम में रह रहे कुछ लोगों से हमने प्रत्यक्ष बात की तो उन लोगों ने बताया कि उन्हें प्रतिदिन दोनों समय चाय, खाना और एक समय नाश्ता उपलब्ध कराया जा रहा है। प्रतिदिन शाम को सांस्कृतिक कार्यक्रमों के जरिए उनके मनोरंजन की व्यवस्था भी कराई गई है। सोने के लिए चटाई उपलब्ध कराई गई है। सारे लोगों के मेडिकल टेस्ट हुए हैं और स्क्रीनिंग दो बार हो चुकी है। माहौल इतना अच्छा कि कहीं कोई तनाव नहीं और सुविधाएं इतनी उम्दा कि यहां रुके कई व्यक्ति छत्तीसगढ़ से अब जाना ही नहीं चाहते। वे आशा करते हैं-काश ! छत्तीसगढ़ में ही उन्हीं कोई मिल जाता।

पेश हैं शेल्टर होम में ठहरे कुछ ऐसे ही लोगों की कहानी…

ढाबा मालिक ने नौकरी से निकाला, अब रोज 20 मास्क बना रहीं सुशीला


सुशीला तांडी नामक महिला जो बरगड़ ओडिशा की निवासी है, उन्हें छत्तीसगढ़ (chhattisgarh) की राजधानी रायपुर के एक ढाबा संचालक ने रात को चार बजे काम से निकाल दिया और उन्हें कोई वेतन भी नहीं दिया। 24 मार्च को इस महिला का परिवार पैदल ही ओडिशा स्थित अपने घर जाने को निकल पड़ा लेकिन बसें बंद हो जाने के कारण यह घर वापस नहीं जा पाए, तब पुलिस ने इन्हें सेंटर होम में छोड़ा। तब से ये इसी शेल्टर होम में हैं। वहां रहते हुए इस महिला ने सिलाई सीखी और अब प्रतिदिन लगभग 20 मास्क बना रही हैं।

मोबाइल व पैसे हुए चोरी, आश्रय स्थल ने भूखों मरने से बचाया : कमलेश


मध्य प्रदेश के मंडला के कमलेश छांटा नामक युवक को होटल हरि ढाबा ने काम से निकाल दिया। घर जाने के लिए स्टेशन पहुंचा तो ट्रेनें बंद थीं। रात को प्लेटफार्म पर कुछ असामाजिक तत्वों ने इनका मोबाइल व पैसे छीन लिए। दूसरे दिन सुबह इन्हें पुलिस ने शेल्टर होम पहुंचाया। तब से ये वहीं है। बहुत आभार व्यक्त करते हैं कि मुझे भूखों मरने से बचा लिया। वहीं विजयपुर के सुरेश गौतम की कहानी भी लगभग ऐसी ही है। वे भी पैदल घर लौटते हुए पुलिस के द्वारा शेल्टर होम पहुंचाए गए। वे बहुत खुश होकर कहते हैं- घर जैसे लगता है यहां।


गुजरात से गुमला के लिए निकला था, अब यहीं मिल जाए कोई काम : बंधन सिंह


झारखंड गुमला के गुजरात में ड्राइवरी कर रहे बंधन सिंह गुजरात के भरुच जिले से चलकर लगभग 800 किमी का सफर पैदल चलते हुए रायपुर पहुंचे। इनकी कहानी बड़ी दयनीय है। तरुण बाबू नामक ट्रांसपोर्टर के यहां काम करने वाला यह ड्राइवर 24 मार्च को काम से हटा दिया गया और इन्हें घर जाने के लिए बोल दिया गया। सूरत रेलवे स्टेशन पर पुलिस ने इन्हें मारपीटकर भगा दिया और जिस रात ये मैदान में सोए थे तब इनके तीन हजार रुपए व सामान कोई उठा ले गया। ये बताते हैं कि सिर्फ चड्डी-बनियान में ये पैदल गुमला के लिए चल पड़े तब इन्हें सोनगढ़, गुजरात, में पुलिस ने पकड़ा और तीन दिन तक एक मंदिर में रखा।

उनका वहां ब्लड टेस्ट किया गया। इसमें वे स्वस्थ साबित हुए। इसके बाद पुलिस ने इन्हें हाईवे पर छोड़ दिया। वहां से वे महाराष्ट्र के धुलिया होते हुए छत्तीसगढ़ (chhattisgarh)के बॉर्डर देवरी तक पहुंच गए। देवरी बॉर्डर पर रोका गया, जहां से उन्हें अनुनय-विनय के बाद उन्हें जाने दिया गया। किसी तरह वे रायपुर पहुंचे और 11 दिन के इस लंबे सफर का अंत हुआ। 5 अप्रैल से वे शेल्टर होम में हैं। उनका कहना है कि अगर छत्तीसगढ़ में उन्हें काम मिल जाए तो वे न गुमला जाना चाहते हैं और न गुजरात।


नागपुर के ठेकेदार ने नहीं दी तनख्वाह, यहां मिल शांति, छत्तीसगढ़ सरकार का आभार : ईश्वर प्रसाद

नागपुर में अपने छह साथियों के साथ हफीज नामक ठेकेदार के यहां 15 हजार रुपए महीने की नौकरी करने वाले उत्तर प्रदेश के सोनभद्र के ईश्वर प्रसाद नामक सैनिटरी फिटिंग करने वाले व्यक्ति भी नागपुर से पैदल सोनभद्र के लिए चल पड़े और पांच दिन की यात्रा के बाद रायपुर पहुंचे तो पुलिस ने इन्हें यहां रोककर शेल्टर होम पहुंचा दिया।

इनका कहना है कि इन्हें न तनख्वाह मिली न कोई सहायता। भूख से बिलबिलाते ईश्वर प्रसाद व उनके छह साथी शेल्टर होम में शांति से रह रहे हैं। और छत्तीसगढ़ (chhattisgarh) शाासन का आभार व्यक्त कर रहे हैं। लगभग सभी लोगों की एक समान कहानी है। जहां करुणा उमड़कर आती है और यह जज्बा भी जगाती है कि हमारा देश क्यों दुनिया में सामाजिकता के नाम पर सर्वश्रेष्ठ है।

https://www.youtube.com/watch?v=6FBxpoMbueo

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