छत्तीसगढ़

Chhattisgarh High Court Decision : दैनिक वेतनभोगियों की बड़ी जीत, हाई कोर्ट ने कहा- बरसों तक अस्थाई रखना गलत, 4 महीने में नियमित करने का आदेश

छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों के नियमितीकरण को लेकर एक ऐतिहासिक और मानवीय (Chhattisgarh High Court Decision) फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट रूप से कहा है कि किसी भी कर्मचारी को दशकों तक अस्थाई या दैनिक वेतनभोगी बनाए रखना प्रशासनिक मर्यादा और नैतिकता के विरुद्ध है।

जस्टिस पी.पी. साहू की सिंगल बेंच ने वन विभाग के कर्मचारियों की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि वह इन कर्मचारियों के नियमितीकरण की मांग पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करे और अगले चार महीनों के भीतर इस पर ठोस निर्णय ले।

सरकार की बजट संतुलन नीति पर कोर्ट की तीखी टिप्पणी (Chhattisgarh High Court Decision)

सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने सरकार की उस कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराजगी जताई, जिसमें एडहॉक (तदर्थ) और आउटसोर्सिंग के जरिए नियमित नियुक्तियों से बचने की कोशिश की जाती है।

अदालत ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि सरकार एक ‘संवैधानिक नियोक्ता’ है और वह उन गरीब कर्मचारियों के दम पर अपना बजट संतुलित नहीं कर सकती, जो सालों से महत्वपूर्ण सार्वजनिक सेवाओं को संभाल रहे हैं। कोर्ट ने साफ किया कि जहां काम 12 महीने का है और उसकी प्रकृति स्थाई है, वहां कर्मचारियों को लंबे समय तक अस्थाई लेबल के साथ रखना उनके मौलिक अधिकारों और गरिमा का हनन है।

उम्र की सीमा और भविष्य की चिंता पर मानवीय दृष्टिकोण

यह पूरा मामला वन विभाग में कार्यरत 18 से अधिक कंप्यूटर ऑपरेटरों, कार्यालय सहायकों और सुरक्षा श्रमिकों से जुड़ा है, जो साल 2006 से 2016 के बीच नियुक्त (Chhattisgarh High Court Decision) हुए थे।

याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट को बताया कि वे 10 साल से भी अधिक समय से निरंतर सेवा दे रहे हैं और अब वे सरकारी सेवाओं के लिए निर्धारित आयु सीमा को पार कर चुके हैं। यदि इस मोड़ पर उन्हें नियमित नहीं किया जाता या नौकरी से बाहर कर दिया जाता है, तो उनके और उनके परिवार के सामने भरण-पोषण और गहरे आर्थिक संकट की स्थिति खड़ी हो जाएगी।

सुप्रीम कोर्ट के नजीर का दिया हवाला

अपने आदेश में हाई कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा ‘नरेंद्र कुमार तिवारी विरुद्ध झारखंड सरकार’ मामले में दिए गए ऐतिहासिक फैसले का संदर्भ दिया। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कहा है कि यदि कोई कर्मचारी स्वीकृत पदों पर 10 साल या उससे अधिक समय से सेवा (Chhattisgarh High Court Decision) दे रहा है, तो उसे केवल तकनीकी आधारों पर नियमितीकरण के लाभ से वंचित नहीं किया जा सकता।

हाई कोर्ट ने राज्य सरकार की आर्थिक तंगी वाली दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि सरकार को एक ‘आदर्श नियोक्ता’ की तरह व्यवहार करना चाहिए और एडहॉक संस्कृति को बढ़ावा देने के बजाय कर्मचारियों के हक में फैसला लेना चाहिए।

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