Chhattisgarh Folk Culture Dublin : छत्तीसगढ़ की कला आयरलैंड तक पहुँची

Chhattisgarh Folk Culture Dublin

छत्तीसगढ़ की कला और लोकसंस्कृति ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी पहचान (Chhattisgarh Folk Culture Dublin) बनाई है। आयरलैंड की राजधानी डबलिन में भारतीय दूतावास, डबलिन के तत्वावधान में स्टेट कल्चरल इवेंट सीरीज़ के तहत छत्तीसगढ़ राज्य पर केंद्रित भव्य सांस्कृतिक आयोजन का सफल आयोजन किया गया।

इस आयोजन में आयरलैंड में रहने वाले भारतीय समुदाय के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय दर्शकों ने भी उत्साहपूर्वक भाग लिया और छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विविधता को सराहा।

कार्यक्रम का उद्घाटन आयरलैंड में भारत के राजदूत श्री अखिलेश मिश्रा ने किया। उन्होंने छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, जनजातीय परंपराओं और राज्य की विशिष्ट पहचान पर प्रकाश डालते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम भारत की विविधता को वैश्विक मंच पर मजबूती से प्रस्तुत करते हैं।

इस आयोजन के माध्यम से छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति, कला और परंपरा ने अपनी अलग पहचान बनाई और दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

कार्यक्रम में Chhattisgarh Folk Culture Dublin पर आधारित विस्तृत प्रस्तुति दी गई, जिसमें राज्य की कला, संस्कृति, परंपरा और विकास यात्रा को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया।

साथ ही छत्तीसगढ़ के पारंपरिक हस्तशिल्प की प्रदर्शनी ने आगंतुकों का ध्यान आकर्षित किया। हस्तशिल्प की बारीकी, डिज़ाइन और गुणवत्ता ने दर्शकों का मन मोह लिया।

सांस्कृतिक कार्यक्रमों की कड़ी में पारंपरिक वेशभूषा में लोक नृत्य और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने समां बांध दिया। कलाकारों की जीवंत प्रस्तुतियों ने छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति की आत्मा को आयरलैंड की धरती तक पहुँचा दिया और दर्शकों से भरपूर प्रशंसा प्राप्त की। कार्यक्रम का समापन छत्तीसगढ़ के पारंपरिक व्यंजनों के साथ हुआ, जिसने उपस्थित अतिथियों को राज्य की स्वादिष्ट पाक-परंपरा से परिचित कराया।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस कार्यक्रम को छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का क्षण बताते हुए कहा कि डबलिन में आयोजित यह छत्तीसगढ़ केंद्रित सांस्कृतिक कार्यक्रम राज्य की कला, संस्कृति और परंपराओं को अंतरराष्ट्रीय मंच पर नई पहचान दे रहा है। उन्होंने भारतीय दूतावास, डबलिन और वहां रहने वाले भारतीय समुदाय की सराहना की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ की जनजातीय कला, हस्तशिल्प और लोक परंपराएँ राज्य की पहचान का मूल आधार हैं। इस आयोजन से कलाकारों और कारीगरों को प्रेरणा मिली है और इससे पर्यटन, हस्तशिल्प और स्थानीय उत्पादों को वैश्विक स्तर पर नई संभावनाएँ मिलेंगी।

छत्तीसगढ़ सरकार कला-संस्कृति के संरक्षण और प्रचार-प्रसार के लिए निरंतर प्रयासरत है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि भविष्य में भी छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत को देश-विदेश में इसी तरह मंच मिलेगा और राज्य की विशिष्ट पहचान विश्व पटल पर और अधिक सुदृढ़ होगी।

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