Chhattisgarh Education Department : शिक्षा विभाग में अनुशासनहीनता पर लगाम, विभागीय जांच की सुस्त रफ्तार पर संचालक नाराज

छत्तीसगढ़ लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) ने शिक्षा विभाग के भीतर चल रही अनुशासनात्मक कार्यवाहियों और विभागीय जांचों में हो रही अत्यधिक देरी को लेकर अब सख्त रुख अपना (Chhattisgarh Education Department) लिया है। विभाग द्वारा जारी ताजा निर्देशों में सभी संभागीय संयुक्त संचालकों और जिला शिक्षा अधिकारियों को स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि जांच प्रक्रिया में किसी भी स्तर पर होने वाली सुस्ती अब बर्दाश्त नहीं होगी।

संचालनालय ने यह पाया है कि कई मामलों में जांच अधिकारियों की लापरवाही के कारण प्रक्रिया वर्षों तक खिंचती रहती है, जिससे न केवल न्याय में देरी होती है बल्कि दोषी कर्मचारी भी इसका अनुचित लाभ उठाने में सफल हो जाते हैं। अब ऐसी फाइलों को धूल फांकने से रोकने के लिए विभाग ने सख्त समय-सीमा तय कर दी है।

जांच के लिए समय-सीमा तय, 3 और 6 महीने का अल्टीमेटम (Chhattisgarh Education Department)

विभागीय स्तर पर होने वाली देरी को खत्म करने के लिए डीपीआई ने स्पष्ट ‘डेडलाइन’ जारी की है। नए आदेशों के मुताबिक, जिन मामलों में मुख्य शास्ति (Major Penalty) का प्रावधान है, उन्हें अधिकतम 6 महीने के भीतर निपटाना होगा।

वहीं, लघु शास्ति (Minor Penalty) से जुड़े प्रकरणों को महज 3 महीने में पूरा करने का लक्ष्य दिया गया है। अक्सर देखा गया है कि क्षेत्रीय कार्यालयों से भेजे जाने वाले प्रस्ताव अधूरे या तकनीकी रूप से गलत होते हैं, जिसके कारण दोषी कर्मचारी उच्च न्यायालय की शरण (Chhattisgarh Education Department) ले लेते हैं। इससे विभाग की साख तो गिरती ही है, साथ ही प्रक्रियात्मक त्रुटियों के कारण कड़ी कार्रवाई करना मुश्किल हो जाता है।

गबन और अनियमितता के मामलों में अनिवार्य दस्तावेज

वित्तीय अनियमितताओं और गबन जैसे गंभीर मामलों पर विभाग ने विशेष ध्यान केंद्रित किया है। अब निलंबन या विभागीय जांच के किसी भी प्रस्ताव के साथ छत्तीसगढ़ सिविल सेवा नियम, 1966 के नियम 14 और 16 का कड़ाई से पालन करना अनिवार्य होगा।

प्रस्ताव में आरोपों का साक्ष्य, गवाहों की सूची और प्रमाणित अभिलेखों की स्पष्ट प्रतियां लगाना अब कंपलसरी कर दिया गया है। यदि कोई कर्मचारी जांच के दौरान जानबूझकर अनुपस्थित रहता है, तो मामले को लटकाने के बजाय साक्ष्यों के आधार पर एकतरफा निर्णय लेने के निर्देश (Chhattisgarh Education Department) दिए गए हैं। इस कदम से उम्मीद है कि शिक्षा विभाग की प्रशासनिक व्यवस्था में पारदर्शिता आएगी और दोषी अधिकारियों या कर्मचारियों पर समय रहते गाज गिर सकेगी।

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