संपादकीय

संपादकीय : जनसंख्या नियंत्रण कानून जरूरी

Population control: जनसंख्या नियंत्रण कानून बनाने की मांग एक बार फिर जोर पकडऩे लगी है। हर साल की तरह इस बार भी जनसंख्या संबंधित समस्याओं पर वैश्विक चेतना जगाने के उद्देश्य से विश्व जनसंख्या दिवस मनाने की औपचारिकता पूरी कर ली गई। सरकार ने बढ़ती आबादी पर नियंत्रण के उद्देश्य से जनजागरूकता अभियान का सूत्रपात किया है।

इसके तहत जनसंख्या स्थिरीकरण पखवाड़ा मनाया जा रहा है। इसके तहत नियोजित परिवार के लिए लोगों को प्रेरित करने विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। पुरुष और महिला नसबंदी को प्रोत्साहित करने के लिए उन्हें प्रतिपूर्ति राशि के रूप में दो हजार से तीन हजार तक प्रदान किए जा रहे हैं।

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सभी शासकीय अस्पतालों में नि:शुल्क आपरेशन की सुविधा मुहैया कराई जा रही है। इससे बढ़ती आबादी पर कितनी रोक लगेगी यह कह पाना मुहाल है। गौरतलब है कि भारत में दिन दूनी रात चौगुणी रफ्तार से आबादी बढ़ती जा रही है और जनसंख्या के मामले में चीन को पछाड़ कर भारत दुनिया में सबसे ज्यादा आबादी वाला देश बन गया है।

भारत की जनसंख्या 140 करोड़ से भी अधिक हो चूंकि है। यदि इसी रफ्तार से भारत की जनसंख्या बढ़ती रही तो यहां जनसंख्या विस्फोट का खतरा पैदा हो सकता है। यही वजह है कि समय-समय पर जनसंख्या नियंत्रण कानून लागू करने की मांग उठती रही है। किन्तु सरकार इस गंभीर मुद्दे को अभी भी गंभीरता से लेने के लिए तैयार नहीं है।

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विश्व जनसंख्या दिवस पर केन्द्रीय मंत्री गिरीराज सिंह ने एक बार फिर जनसंख्या नियंत्रण कानून को लागू करने की जरूरत पर जोर दिया है। उनका कहना है कि हमें इस मामले में चीन से सबक लेना चाहिए। जिसने बढ़ती आबादी पर रोक लगाने के लिए कड़े कानून बनाए जिसकी वजह से वहां जनसंख्या पर नियंत्रण लगा लेकिन भारत में ऐसा कोई कानून न बन पाने के कारण हमारी आबादी बढ़ती रही और आज हम चीन को पीछे छोड़कर आबादी के मामले में दुनिया में अव्वल हो गए हैं।

उन्होंने जनसंख्या नियंत्रण कानून को इतना कड़ा बनाने की मांग की है कि कोई भी इसका उल्लंघन न कर पाएं। उनका सुझाव है कि जिनके दो से अधिक बच्चे हों उन्हें किसी भी तरह की शासकीय सुविधाओं का लाभ न दिया जाए। यहां तक कि उनके मताधिकार को भी खत्म कर दिया जाए।

इस तरह के कड़े कानूनी प्रावधान करने से भी आबादी पर नियंत्रण लगेगा और जनसंख्या विस्फोट के खतरे को टाला जा सकेगा। उनकी यह मांग और सुझाव गौरतलब है। वास्तव में भारत में गरीबी, भूखमरी, अशिक्षा और बेरोजगारी जैसी जितनी भी जटिल समस्याएं हैं उनकी जननी बढ़ती आबादी ही है।

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हर साल लाखों लोग डिग्रियां लेकर रोजगार की तलाश में निकल पड़ते हैं। कोई भी सरकार हर साल लाखों युवाओं को रोजगार मुहैया नहीं करा सकती। जब बेरोजगारी फैलेगी तो गरीबी भी सिर उठाएगी।

आज भी हमारे देश में एक तिहाई आबादी गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने के लिए अभिशप्त है। इतनी बड़ी आबादी को शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराना ही सरकार के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण कार्य सिद्ध हो रहा है।

देश में संसाधन सीमित हैं और उस पर बढ़ती आबादी का बोझ इसी तरह बढ़ता रहा तो आने वाले समय में न सिर्फ लोगों को पर्याप्त भोजन उपलब्ध हो पाएगा बल्कि पीने के पानी की किल्लत का भी सामना करना पड़ेगा।इसके पहले पानी सिर से ऊंचा हो सरकार को जनसंख्या नियंत्रण कानून जल्द से जल्द लागू करने पर गंभीरतापूर्वक विचार करना चाहिए।

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