Chhattisgarh Budget Session : जेल से लौटे कवासी लखमा पहुंचे विधानसभा, सत्ता-विपक्ष के नेताओं ने गले लगाकर किया स्वागत

छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र के पहले दिन उस वक्त खास राजनीतिक माहौल देखने (Chhattisgarh Budget Session) को मिला, जब शराब घोटाले के मामले में जेल में बंद रहे पूर्व आबकारी मंत्री और कोंटा विधायक कवासी लखमा अंतरिम जमानत मिलने के बाद सदन की कार्यवाही में हिस्सा लेने पहुंचे।
हाई कोर्ट से राहत मिलने और विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह द्वारा निर्धारित शर्तों के साथ अनुमति दिए जाने के बाद लखमा ने बजट सत्र में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। लंबे समय बाद सदन पहुंचे लखमा ने पहले कांग्रेस के विधायकों और नेताओं से मुलाकात की, जिसके बाद सत्ताधारी दल के नेताओं से भी औपचारिक रूप से मिले।
सदन के भीतर का दृश्य उस समय खास बन गया, जब राजनीतिक मतभेदों से अलग हटकर सत्ता पक्ष के कई वरिष्ठ नेताओं ने कवासी लखमा का गर्मजोशी से स्वागत किया। कृषि मंत्री रामविचार नेताम, विधायक धर्मजीत सिंह, अजय चंद्राकर और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष किरण सिंह देव ने उन्हें गले लगाकर आत्मीयता जताई, वहीं वन मंत्री केदार कश्यप और वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने हाथ मिलाकर उनका स्वागत (Chhattisgarh Budget Session) किया।
लखमा भी अपने चिरपरिचित अंदाज में नजर आए और उन्होंने सभी नेताओं से सहजता के साथ मुलाकात की। इस दौरान सदन में सत्ता और विपक्ष के बीच सौहार्दपूर्ण माहौल देखने को मिला, जो राजनीतिक रूप से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
हालांकि विधानसभा ने कवासी लखमा की मौजूदगी को लेकर स्पष्ट शर्तें तय की हैं। उन्हें जब भी सदन में आना या जाना होगा, इसकी पूर्व सूचना विधानसभा सचिवालय को देनी होगी और उनकी गतिविधियों का पूरा रिकॉर्ड रखा जाएगा।
उन्हें अपने विधानसभा क्षेत्र कोंटा जाने या किसी भी राजनीतिक या सार्वजनिक कार्यक्रम में भाग लेने की अनुमति नहीं होगी। उनकी उपस्थिति केवल विधानसभा परिसर और सदन की कार्यवाही तक ही सीमित रहेगी। यह व्यवस्था इसलिए की गई है ताकि वे केवल विधायी कार्यवाही में भाग ले सकें और किसी अन्य गतिविधि में शामिल न हों।
विधानसभा के बजट सत्र के पहले दिन राज्यपाल का अभिभाषण भी हुआ, जिसमें सरकार की नीतियों और आगामी योजनाओं की रूपरेखा प्रस्तुत (Chhattisgarh Budget Session) की गई। परंपरा के अनुसार पहले दिन प्रश्नकाल नहीं रखा गया, जबकि सत्र के दूसरे दिन से नियमित कार्यवाही के साथ एक घंटे का प्रश्नकाल शुरू होगा। प्रश्नकाल को विधानसभा की कार्यवाही का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है, जिसमें विधायक सरकार से सीधे सवाल पूछते हैं और जवाबदेही तय होती है।
कवासी लखमा की सदन में वापसी और सत्ता पक्ष के नेताओं द्वारा उनका स्वागत राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है। इसे विधानसभा की परंपरा और लोकतांत्रिक मर्यादा का हिस्सा माना जा रहा है, जहां राजनीतिक मतभेदों के बावजूद विधायकों के बीच व्यक्तिगत और संस्थागत सम्मान कायम रहता है।



