प्रदेश में चर्चित लोक सेवा आयोग मामले को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज (CGPSC Scam) हो गई है। अभ्यर्थियों के बीच लंबे समय से उठ रहे सवालों के बीच जब जांच आगे बढ़ी तो कई ऐसे दावे सामने आए, जिनकी चर्चा परीक्षा की तैयारी करने वाले युवाओं से लेकर आम लोगों तक के बीच होने लगी। मामले को लेकर लगातार हलचल बनी हुई है और हर नई जानकारी पर लोगों की नजर टिकी हुई है।
राजधानी से लेकर जिलों तक इस मामले की गूंज सुनाई दे रही है। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं में भी यह जानने की उत्सुकता है कि आखिर भर्ती प्रक्रिया में किन आधारों पर अनियमितताओं के आरोप लगाए गए और जांच एजेंसियों को अब तक क्या जानकारी मिली है।
भर्ती प्रक्रिया को लेकर लगे गंभीर आरोप : CGPSC Scam
यह पूरा मामला वर्ष 2020 से 2022 के बीच आयोजित भर्ती प्रक्रियाओं से जुड़ा हुआ है। आरोप है कि परीक्षा और साक्षात्कार की प्रक्रिया में पारदर्शिता का पालन नहीं किया गया और प्रभावशाली परिवारों से जुड़े उम्मीदवारों को फायदा पहुंचाया गया।
जांच में यह भी आरोप सामने आया कि कई योग्य अभ्यर्थियों की अनदेखी करते हुए महत्वपूर्ण प्रशासनिक और पुलिस पदों पर अपने करीबी लोगों को चयनित कराने का प्रयास किया गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच की जिम्मेदारी केंद्रीय एजेंसी को सौंपी गई।
जांच में मिले दस्तावेज और साक्ष्य
जांच एजेंसी की कार्रवाई के दौरान कई दस्तावेज और अन्य महत्वपूर्ण साक्ष्य मिलने का दावा किया गया है। इन्हीं तथ्यों के आधार पर पूरे मामले की अलग अलग स्तर पर जांच आगे बढ़ाई जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया से जुड़े कई पहलुओं की पड़ताल की जा रही है ताकि पूरे घटनाक्रम की सच्चाई सामने आ सके।
रिश्तेदारों और करीबियों को लाभ पहुंचाने का आरोप
जांच एजेंसी ने अदालत में कहा कि वर्ष 2020 से 2022 के दौरान आयोजित राज्य सेवा परीक्षा में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं के आरोप सामने (CGPSC Scam) आए हैं। आरोप है कि तत्कालीन अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए रिश्तेदारों और करीबी लोगों को अनुचित लाभ पहुंचाया।
जांच में यह भी दावा किया गया कि एक निजी कंपनी की ओर से सीएसआर मद के तहत 45 लाख रुपए एक ऐसे संगठन को दिए गए, जिसकी अध्यक्षता सोनवानी की पत्नी कर रही थीं। आरोप है कि इसके बदले प्रश्नपत्र लीक किए गए।
प्रश्नपत्र लीक होने के आरोप
जांच एजेंसी के अनुसार परीक्षा नियंत्रक आरती वासनिक और डिप्टी परीक्षा नियंत्रक ललित गनवीर की भूमिका भी जांच के दायरे में है। आरोप है कि अध्यक्ष के निर्देश पर उद्योगपति श्रवण गोयल तक प्रश्नपत्र पहुंचाए (CGPSC Scam) गए। बताया गया कि आगे यह प्रश्नपत्र उनके बेटे और बहू तक पहुंचे, जिनका चयन डिप्टी कलेक्टर पद के लिए हुआ। वहीं जांच में यह भी आरोप लगाया गया कि सोनवानी के रिश्तेदारों का चयन भी महत्वपूर्ण पदों पर हुआ।
कई चयनों पर उठे सवाल
मामले में डिप्टी कलेक्टर और डिप्टी पुलिस अधीक्षक जैसे पदों पर हुए कुछ चयन भी जांच के केंद्र में हैं। जांच एजेंसी पूरे घटनाक्रम की कड़ियों को जोड़ते हुए यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि भर्ती प्रक्रिया में नियमों का कितना पालन हुआ और किन स्तरों पर कथित अनियमितताएं हुईं।
