24 गांवों की प्यास नहीं बुझा पाई 62 करोड़ की परियोजना, जिम्मेदार कौन?

62 करोड़ फूंक दिए, फिर भी प्यासे 24 गांव! धीरी नल-जल योजना पर घिरा पीएचई विभाग

करोड़ों की लागत, शून्य राहत
रमेश निवल बालू
राजनांदगांव।
करोड़ों रुपये की लागत से तैयार की गई धीरी नल-जल समूह योजना इन दिनों अपने उद्देश्य पर खरा उतरने के बजाय सवालों के घेरे में है। जिन 24 गांवों के हजारों ग्रामीणों को इस योजना से नियमित और पर्याप्त पेयजल मिलने की उम्मीद थी, वे आज पानी की एक-एक बूंद के लिए परेशान हैं। हालात इतने गंभीर हो चुके हैं कि क्षेत्र में जल संकट को लेकर लोगों की चिंता बढ़ती जा रही है।
ग्रामीणों के अनुसार योजना के लिए प्रमुख जल स्रोत मानी जाने वाली शिवनाथ नदी में अब महज एक सप्ताह का पानी शेष बचा है। इसके बावजूद लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (पीएचई) विभाग की ओर से किसी ठोस वैकल्पिक व्यवस्था की जानकारी सामने नहीं आई है। विभागीय अधिकारियों की चुप्पी से ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। पानी की किल्लत का असर परमालकसा, ककरेल, टेड़ेसरा, अचानकपुर, महुआभाटा, तोरणकटा, इंदावानी, सोमनी, फुलझर और कोपेडीह सहित दो दर्जन से अधिक गांवों में साफ दिखाई दे रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि गर्मी के इस दौर में पेयजल संकट ने उनकी दिनचर्या को प्रभावित कर दिया है और कई स्थानों पर लोगों को दूर-दूर से पानी लाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।

28 करोड़ की योजना 62 करोड़ तक पहुंची
धीरी नल-जल समूह योजना शुरू से ही विवादों और तकनीकी सवालों के बीच घिरी रही है। जानकारी के मुताबिक, नाबार्ड के सहयोग से शुरू हुई इस परियोजना की प्रारंभिक लागत करीब 28 करोड़ रुपये तय की गई थी। हालांकि निर्माण कार्य के दौरान इसकी लागत बढ़ते-बढ़ते लगभग 62 करोड़ रुपये तक पहुंच गई। इसके बावजूद योजना ग्रामीणों को अपेक्षित लाभ देने में नाकाम साबित हो रही है।

परियोजना के निर्माण में तकनीकी खामियां रहीं
स्थानीय लोगों और जानकारों का आरोप है कि परियोजना के निर्माण में तकनीकी खामियां रहीं। उनका कहना है कि धीरी क्षेत्र के बजाय ईराघाट में इंटेक वेल बनाए जाने से जल आपूर्ति व्यवस्था प्रभावित हुई, जिसका असर आज पूरे क्षेत्र को भुगतना पड़ रहा है। करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी जब गांवों तक पर्याप्त पानी नहीं पहुंच पा रहा है, तो योजना की उपयोगिता और गुणवत्ता पर गंभीर प्रश्न खड़े हो रहे हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन और पीएचई विभाग से तत्काल हस्तक्षेप, जल संकट के स्थायी समाधान तथा योजना की तकनीकी और वित्तीय जांच कराने की मांग की है, ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने।
वर्जन –
धीरी नल जल समूह योजना अंतर्गत गांव में पर्याप्त मात्रा में पानी  तो नहीं लेकिन गांव में अलग से और बोर है, जिसमें पंप लगाकर पानी की आपूर्ति ग्रामीणों को किया जा रहा है। – चुनेश्वर साहू, सरपंच, ग्राम पंचायत कोपेड़ीह

मेरे कार्यकाल के समय भी इस मामले को लेकर मैंने कई बार पत्र लिखा था, लेकिन आज तक इसका निवारण नहीं हो पाया। पानी टंकी में चढ़ ही नहीं पता तो पानी सप्लाई कैसे होगा। – योगेश्वर निर्मलकर, पूर्व सरपंच, बैगा टोला

पर्याप्त मात्रा भी दोनों टाइम पानी नहीं आ रहा है। ग्रामीण पानी को लेकर परेशान हैं। मैं तो अपने घर के बोर के पानी का इस्तेमाल कर रहा हूं- तामेश्वर रात्रे पूर्व सरपंच इंदावानी

मैं वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में हूं। अभी मैं इस बारे में आपको कुछ नहीं बता सकती। बाद में फोन कीजियेगा। – पलक कोठारी, कार्यपालक अभियंता, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग

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