CG Vidhansabha Winter Session : नए भवन में नई सियासत – विधानसभा सत्र के दूसरे दिन सरकार की अग्निपरीक्षा
CG Vidhansabha Winter Session
छत्तीसगढ़ विधानसभा का शीतकालीन सत्र जैसे-जैसे आगे बढ़ रहा है, सदन के भीतर राजनीतिक सरगर्मी तेज होती जा रही है। सत्र के दूसरे दिन की कार्यवाही खास मानी (CG Vidhansabha Winter Session) जा रही है, क्योंकि विपक्ष आज किसानों से जुड़े मुद्दों को लेकर सरकार के सामने सीधा सवाल खड़ा कर सकता है।
नए विधानसभा भवन में शुरू हुए इस सत्र को लेकर पहले दिन से ही यह संकेत मिल गए थे कि कार्यवाही शांत नहीं रहने वाली। सीमित अवधि के बावजूद इस बार सदस्यों ने बड़ी संख्या में सवाल और सूचनाएं लगाई हैं, जिससे सरकार पर लगातार जवाब देने का दबाव बना हुआ है।
628 सवाल, 48 ध्यानाकर्षण, साफ है एजेंडा
इस सत्र के लिए कुल 628 प्रश्न लगाए गए हैं, जिनमें 333 तारांकित प्रश्न शामिल हैं। इसके अलावा राज्य और क्षेत्रीय स्तर से जुड़े 48 ध्यानाकर्षण प्रस्तावों ने यह साफ (CG Vidhansabha Winter Session) कर दिया है कि सदस्य अपने-अपने क्षेत्रों की समस्याओं को सदन में मजबूती से उठाने के मूड में हैं।
विपक्ष ने सत्र के सभी दिनों के लिए अलग-अलग स्थगन विषय तय किए हैं। आज धान खरीदी की व्यवस्था, कल नई गाइडलाइन दरें और कानून व्यवस्था जैसे मुद्दों को लेकर सरकार की घेराबंदी की रणनीति बनाई गई है।
धान खरीदी पर होगी सीधी टक्कर
आज 15 दिसंबर को धान खरीदी में सामने आ रही समस्याएं सदन की कार्यवाही पर हावी रह सकती हैं। खरीदी केंद्रों की स्थिति, किसानों को हो रही असुविधा और व्यवस्थागत खामियों को लेकर विपक्ष स्थगन प्रस्ताव के जरिए सरकार से जवाब मांग सकता है।
इस मुद्दे की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सत्तापक्ष के विधायकों ने भी अपने क्षेत्रों में धान खरीदी से जुड़े सवाल लगाए हैं। ऐसे में सरकार के लिए संतुलित जवाब देना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
विधेयक और बजट पर भी नजर
सत्र के दौरान सरकार छत्तीसगढ़ दुकान एवं स्थापना, नियोजन एवं सेवा शर्तों से संबंधित संशोधन विधेयक सदन में पेश करेगी। इसके साथ ही मौजूदा वित्तीय वर्ष के लिए प्रथम अनुपूरक बजट भी आज प्रस्तुत किया जाएगा। बजट पर चर्चा के दौरान विपक्ष का रुख क्या (CG Vidhansabha Winter Session) रहता है, इस पर भी सभी की नजरें रहेंगी।
शीतकालीन सत्र 17 दिसंबर तक प्रस्तावित है, लेकिन मौजूदा हालात को देखते हुए हर दिन सदन में राजनीतिक तापमान ऊंचा रहने के संकेत मिल रहे हैं। अब देखना यह है कि बहस सीमित दायरे में रहती है या सदन की कार्यवाही बाधित होने की नौबत आती है।
