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Bus Safety NHRC : बसों के डिजाइन में ‘जानलेवा’ खामियों पर मानवाधिकार आयोग ने जताई गंभीर चिंता, राज्यों को भेजा सख्त निर्देश

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने सार्वजनिक परिवहन बसों में मौजूद संभावित ‘घातक डिजाइन खामियों’ को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की है। आयोग ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को पत्र लिखकर कहा है कि यात्रियों की सुरक्षा को प्रभावित करने वाली व्यवस्थागत लापरवाही को तत्काल दूर किया जाए।

एनएचआरसी ने सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय को निर्देश दिया है कि (Bus Safety NHRC) के तहत देशभर में सुरक्षा मानकों का कठोरता से पालन सुनिश्चित किया जाए, नियमों का उल्लंघन करने वाली बसों को वापस बुलाया जाए और मंजूरी देने वाले अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।

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इसी शिकायत के आधार पर आयोग ने पीड़ितों और उनके परिवारों के लिए प्रभावी मुआवजा तंत्र विकसित करने की भी मांग की है। पत्र में उल्लेख किया गया है कि शिकायतकर्ता ने तत्काल हस्तक्षेप के लिए ‘सुरक्षा डिजाइन में सुधार, जवाबदेही तय करने और प्रभावित लोगों को उचित मुआवजा दिलाने’ की आवश्यकता जताई है।

इसी क्रम में एनएचआरसी रजिस्ट्री को सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के सचिव तथा पुणे स्थित केंद्रीय सड़क परिवहन संस्थान (CIRT) के निदेशक को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए गए हैं। उनसे आरोपों की जांच कर दो सप्ताह के भीतर कार्रवाई रिपोर्ट मांगी गई है ताकि (Bus Safety NHRC) के आधार पर आगे की समीक्षा की जा सके।

आयोग को यह शिकायत राजस्थान के जैसलमेर–जोधपुर राजमार्ग पर 14 अक्टूबर 2025 को स्लीपर बस में लगी भीषण आग की घटना के बाद मिली थी। इस हादसे में कई लोगों की जान गई थी।

हादसे के उपरांत CIRT द्वारा किए गए निरीक्षण में गंभीर उल्लंघन पाए गए—जिनमें अग्नि शमन प्रणाली की कमी, अनुचित आंतरिक डिजाइन और अनिवार्य सुरक्षा मानकों का पालन न होना शामिल है। आयोग ने कहा कि ऐसी घटनाएँ दर्शाती हैं कि (Bus Safety NHRC) से संबंधित सुरक्षा मानकों को लागू करने में व्यापक कमी है।

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शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि कुछ बसों में ड्राइवर का केबिन यात्रियों के कंपार्टमेंट से पूर्णतः अलग होता है, जिससे आपात स्थिति में आग का समय पर पता लगाना और यात्रियों तक सूचना पहुँचना मुश्किल हो जाता है। हाल के कई हादसों में ऐसी डिजाइन त्रुटियों के कारण अनावश्यक मौतें हुईं—जो रोकी जा सकती थीं।

शिकायत में कहा गया है कि इस प्रकार की गंभीर लापरवाही संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत नागरिकों के जीवन के मौलिक अधिकार का उल्लंघन है। बस निर्माण और अनुमोदन प्रक्रिया में हुई व्यवस्थागत खामियाँ (Bus Safety NHRC) के तहत तुरंत सुधार की मांग करती हैं।

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