बेबाक : संसद नहीं पुस्तक मेला चल रहा
संसद में एक किताब को लेकर उठा बवाल कई किताबों तक जा पहुंचा। ऐसा लग रहा है कि संसद नहीं पुस्तक मेला चल रहा है। इससे भी जब माननीयों का दिल नहीं भरा तो नूरा कुश्ती शुरू कर संसद को अखाड़ा बना डाला। कागज के पुर्जे उड़ाकर पतंगबाजी की जाने लगी। फिर अतांक्षरी प्रारंभ हो गई।
एक ने गाना शुरू किया कि – तू गद्दार सही तू मक्कार सही अपना यार पुराना है तुझे इंकार सही… तो जवाब में दूसरे ने नहले पर दहला जड़ दिया क्या मिलिए ऐसे लोगों से जिनकी फितरत छुपी रहे नकली चेहरा सामने आये असली सूरत छुपी रहे…।
