छत्तीसगढ़

Bilaspur High Court Verdict : 11 साल पुराने मिशन स्कूल कांड में बड़ा फैसला, फादर को उम्रकैद, दो महिला स्टाफ को 7-7 साल की सजा

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कोरिया जिले के ज्योति मिशन स्कूल में हुए चर्चित यौन उत्पीड़न (Bilaspur High Court Verdict) मामले में बड़ा और ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने मुख्य आरोपी फादर जोसेफ धन्ना स्वामी को उम्रकैद की सजा सुनाई है।

वहीं, घटना को छिपाने की दोषी पाई गई दो महिला स्टाफ को 7-7 साल के कठोर कारावास की सजा दी गई है। कोर्ट ने सभी दोषियों को दो सप्ताह के भीतर ट्रायल कोर्ट में सरेंडर करने का आदेश दिया है।

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यह मामला कोरिया जिले के सरभोका स्थित ज्योति मिशन स्कूल के हॉस्टल का है, जहां 9 सितंबर 2015 को चौथी कक्षा में पढ़ने वाली 9 वर्षीय छात्रा के साथ दुष्कर्म किया गया था। पीड़िता ने बताया था कि रात के समय बाथरूम जाने के दौरान उसे चक्कर आने लगे और बाद में कमरे में सोते समय आरोपी ने उसके साथ दुष्कर्म किया। घटना की जानकारी देने पर स्कूल की दो महिला स्टाफ ने मदद करने के बजाय उसे धमकाया और मामले को दबाने की कोशिश की।

इस मामले में बैकुंठपुर की फास्ट ट्रैक कोर्ट ने वर्ष 2017 में सभी आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी (Bilaspur High Court Verdict) कर दिया था।

इसके बाद राज्य सरकार ने इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। विस्तृत सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को त्रुटिपूर्ण बताते हुए उसे पलट दिया और साक्ष्यों के आधार पर तीनों आरोपियों को दोषी करार दिया।

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में मेडिकल और फॉरेंसिक रिपोर्ट को महत्वपूर्ण साक्ष्य माना। मेडिकल जांच में पीड़िता के शरीर पर गंभीर चोटों की पुष्टि हुई थी, जबकि एफएसएल रिपोर्ट में कपड़ों पर मानव शुक्राणु पाए जाने की पुष्टि हुई। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि पीड़िता का सुसंगत और विश्वसनीय बयान अपने आप में पर्याप्त साक्ष्य होता है और इसे केवल तकनीकी आधार पर खारिज नहीं किया जा सकता।

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डिवीजन बेंच ने मुख्य आरोपी फादर जोसेफ धन्ना स्वामी को आईपीसी की धारा 376(2) और पॉक्सो एक्ट की धारा 6 के तहत दोषी ठहराते हुए उम्रकैद और जुर्माने की सजा सुनाई है। वहीं, दो महिला स्टाफ को अपराध छिपाने के लिए आईपीसी की धारा 119 के तहत 7-7 साल की सजा दी गई है। अदालत ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि तय समय सीमा में सरेंडर नहीं करने पर पुलिस उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेजेगी।

इस फैसले को न्यायिक प्रक्रिया में पीड़ित को न्याय दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण (Bilaspur High Court Verdict) माना जा रहा है और यह संदेश भी देता है कि गंभीर अपराधों में लापरवाही या साक्ष्यों की अनदेखी को अदालत गंभीरता से लेती है।

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