छत्तीसगढ़

Bilaspur High Court Decision : पति की मौत के बाद बेवा बहू और नाबालिग बेटी को HC ने दिलाया हक़

पति की मौत के बाद पाई पाई को तरस रही मां और बेटी को पैतृक संपत्ति की कमाई में हिस्सा देने ससुराल वाले बाध्य

बिलासपुर/नवप्रदेश। Bilaspur High Court Decision : पति की मौत के बाद बेवा बहू और नाबालिग बेटी को HC ने हक़ दिलाया है। घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम 2005 की प्रत्येक धारा को परिभाषित करते हुए पति की आकस्मिक मौत के बाद बेसहारा माँ और मासूम बेटी के पक्ष में फैसला सुनाया है।

ससुराल वालों की प्रताड़ना और बेवा हुई बहू और उसकी मासूम बच्ची को कोर्ट ने पैतृक संपत्ति की कमाई से 30 हजार रुपये भरण पोषण राशि देने का भी आदेश दिया है।

Bilaspur High Court Decision :
Bilaspur High Court Decision :

न्यायिक मजिस्ट्रेट दुर्ग ने आवेदन पर अंतरिम आदेश पारित करते हुए 5 हजार रुपये आवेदक के नाबालिग पुत्री को प्रति माह देने का आदेश दिया। इसके खिलाफ अनिल मिश्रा व एक अन्य ने अपील की। अपील पर जस्टिस पीपी साहू की कोर्ट में सुनवाई हुई। हाई कोर्ट के समक्ष यह बात आया कि बेवा का ससुर व सास पेंशन भोगी थे।

गांव में उनके नाम पर 7 एकड़ कृषि भूमि व मकान है, उक्त पैतृक संपत्ति में पति की मौत के बाद उसकी पुत्री का बराबर का हक है। उक्त पैतृक संपत्ति पर अपीलकर्ताओं का कब्जा है, व इससे वे व्यवसाय कर कमाई कर रहे हैं। कोर्ट ने मजिस्ट्रेट के आदेश को सही ठहराते हुए, पैतृक संपत्ति की कमाई में से 30 हजार रुपये पीड़िता की पुत्री को देने का आदेश दिया है।

कोर्ट का यह आदेश उन सभी पीड़ितों के लिए मिल का पत्थर साबित होगा, जिनके पति की आकस्मिक मौत के बाद आश्रित पत्नी और बच्चों के जायज हक़ से बेदखल कर दिया जाता है। हाई कोर्ट ने इस मामले में अधिनियम की सभी धारा को परिभाषित करते हुए कहा भले ही नाबालिग ने आवेदन नही दिया था किन्तु वह पैतृक संपत्ति में हिस्सा प्राप्त करने की हकदार है।

यह था पूरा मामला

दुर्ग निवासी अपीलकर्ता अनिल मिश्रा पिता गणेश प्रसाद मिश्रा व एक अन्य के भाई सुनील मिश्रा की 30 जून 2011 को दुर्ग निवासी नीता मिश्रा से शादी हुई थी। शादी के 4 वर्ष बाद अगस्त 2011 में पुत्री का जन्म हुआ। दुर्भाग्य से 2011 में ही पति सुनील मिश्रा का ब्रेन हैमरेज से मौत हो गई। पति की मौत के बाद ससुराल में उसके साथ दुर्व्यवहार होने लगा। नाबालिग बेटी व स्वयं का कोई आश्रय नहीं होने पर ससुराल वालों का जुर्म सहती रही।

अप्रैल 2019 में उसकी अनुपस्थिति में बेटी के साथ मारपीट किया गया। उसने इसका प्रतिकार कर थाना में शिकायत की। इस पर ससुराल वालों ने उसे पिता के नाम का घर एवं गांव के घर व कृषि भूमि में अधिकार देने की बात कही। इसके बाद ससुराल वाले मुकर गए। दोनों को उनका हक़ देने की के बजाये घर से बेदखल कर दिया। इस पर बेवा ने घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम 2005 के तहत नाबालिग बेटी को भरण पोषण राशि दिलाये जाने की मांग की।

Related Articles

Back to top button