छत्तीसगढ़

Bank Employees Strike : 3 दिन बाद भी नहीं खुल पाए ताले, सड़क पर उतरे अफसर और ठप पड़ गई बैंकिंग व्यवस्था

रायपुर सहित पूरे छत्तीसगढ़ में 5 डे-वर्किंग की मांग को लेकर बैंक कर्मियों की हड़ताल शुरू हो गई है। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस के आह्वान पर 27 जनवरी से शुरू हुई इस राष्ट्रव्यापी हड़ताल का असर प्रदेश में साफ तौर पर दिखाई दे रहा है। करीब 25 हजार बैंक अधिकारी और कर्मचारी काम बंद कर सड़क पर उतर आए हैं, जिससे सरकारी बैंकों की सेवाएं पूरी तरह ठप पड़ गई हैं।

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शनिवार और रविवार की साप्ताहिक छुट्टी के बाद सोमवार को गणतंत्र दिवस का राष्ट्रीय अवकाश रहा। लगातार तीन दिन बैंक बंद रहने के बाद मंगलवार को लोगों को उम्मीद थी कि कामकाज (Bank Employees Strike) सामान्य होगा, लेकिन हड़ताल के कारण चौथे दिन भी बैंकों के ताले नहीं खुले। स्थिति यह रही कि छत्तीसगढ़ में करीब 2500 सरकारी बैंक शाखाओं में एक भी नियमित लेनदेन नहीं हो सका।

हड़ताल में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, पंजाब नेशनल बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा, इंडियन ओवरसीज बैंक सहित 12 सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक शामिल हैं। राजधानी रायपुर के साथ-साथ सभी जिलों में सरकारी बैंकों के बाहर कर्मचारियों का प्रदर्शन देखने को मिला। बैंक कर्मियों का कहना है कि सप्ताह में पांच दिन काम की व्यवस्था को तत्काल लागू किया जाए, यही उनकी एकमात्र और प्रमुख मांग है।

बैंक कर्मियों के आंदोलन का सीधा असर आम जनता और व्यापारियों पर पड़ा है। जिन लोगों के खाते सरकारी बैंकों में हैं, उन्हें नकद निकासी, चेक क्लीयरेंस, ड्राफ्ट और अन्य जरूरी कामों के लिए परेशानी का सामना करना (Bank Employees Strike) पड़ रहा है। छोटे व्यापारियों और बैंक पर निर्भर ग्राहकों की मुश्किलें ज्यादा बढ़ गई हैं।

हालांकि, हड़ताल का असर निजी बैंकों पर नहीं पड़ा है। HDFC, ICICI, Axis, Kotak Mahindra, IndusInd, Yes Bank, IDFC और Bandhan Bank सामान्य रूप से खुले रहे और वहां बैंकिंग सेवाएं जारी रहीं। इसके बावजूद अधिकांश खाताधारक सरकारी बैंकों पर निर्भर होने के कारण परेशान नजर आए।

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हड़ताल से पहले अधिकांश सरकारी बैंकों ने अपने ग्राहकों को इसकी जानकारी दे दी थी। बैंक शाखाओं में नोटिस लगाए गए थे और खाताधारकों को नेट बैंकिंग, मोबाइल बैंकिंग और एटीएम जैसे वैकल्पिक माध्यमों का उपयोग करने की सलाह दी गई थी, लेकिन कई जरूरी काम ऐसे हैं जो शाखा पहुंचे बिना संभव नहीं हो पाए।

बैंक यूनियनों ने साफ कर दिया है कि जब तक 5 डे-वर्किंग की मांग पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रह सकता है। ऐसे में आने वाले दिनों में बैंकिंग सेवाओं पर असर और गहराने की आशंका जताई जा रही है।

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