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Rafale deal India : आसमान में फिर बढ़ेगी भारत की ताकत, एक फैसले ने बदला युद्ध संतुलन

नई दिल्ली में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई Defence Acquisition Council (डीएसी) की बैठक में भारतीय वायुसेना के लिए 114 अतिरिक्त Rafale लड़ाकू विमानों की खरीद (Rafale deal India) को मंजूरी दे दी गई। यह खरीद भारत और फ्रांस की सरकारों के बीच अंतर-सरकारी समझौते के तहत की जाएगी। डीएसी ने तीनों सेनाओं के लिए करीब 3.60 लाख करोड़ रुपये के रक्षा खरीद प्रस्तावों को भी हरी झंडी दी है।

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रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इस सौदे के तहत 96 राफेल लड़ाकू विमान टेक्नोलॉजी ट्रांसफर व्यवस्था के अंतर्गत भारत में बनाए जाएंगे, जबकि 18 विमान फ्रांस से सीधे उड़ान के लिए तैयार हालत (Rafale deal India) में प्राप्त होंगे। इससे न केवल वायुसेना की लड़ाकू क्षमता बढ़ेगी, बल्कि ‘मेक इन इंडिया’ को भी बड़ा प्रोत्साहन मिलेगा। सूत्रों के मुताबिक, भारत में बनने वाले विमानों में लगभग 50 प्रतिशत कल-पुर्जे स्वदेशी होंगे।

यह फैसला ऐसे समय लिया गया है, जब फ्रांस के राष्ट्रपति Emmanuel Macron अगले सप्ताह भारत यात्रा पर आने वाले हैं। माना जा रहा है कि उनकी यात्रा से पहले इस प्रस्ताव को मंजूरी देकर भारत ने रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत संकेत (Rafale deal India) दिया है। हालांकि अंतिम समझौते पर मुहर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता वाली सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति लगाएगी, जिसके बाद औपचारिक प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

रक्षा मंत्रालय का कहना है कि राफेल की तैनाती से वायुसेना की हवाई प्रभुत्व क्षमता, लंबी दूरी तक सटीक हमले और प्रतिरोधक शक्ति में बड़ा इजाफा होगा। राफेल हवा से हवा और हवा से जमीन दोनों तरह के अभियानों में सक्षम है और परमाणु हथियार ले जाने की क्षमता भी रखता है। मेटियोर और स्कैल्प क्रूज मिसाइलों से लैस यह विमान दूर से ही दुश्मन पर घातक वार करने में सक्षम माना जाता है। हाल ही में हुए ऑपरेशन सिंदूर में भी राफेल की भूमिका को अहम बताया गया था।

डीएसी की बैठक में वायुसेना के अलावा नौसेना और थलसेना से जुड़े कई अहम प्रस्तावों (Rafale deal India) को भी मंजूरी मिली। नौसेना के लिए अमेरिका से छह अतिरिक्त P-8I समुद्री टोही और पनडुब्बी रोधी विमान खरीदने की आवश्यकता को स्वीकृति दी गई है। ये विमान पूरी तरह तैयार स्थिति में खरीदे जाएंगे और इससे नौसेना की समुद्री निगरानी व एंटी-सबमरीन वारफेयर क्षमता में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होगी।

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इसके अलावा नौसेना के लिए मरीन गैस टर्बाइन आधारित इलेक्ट्रिक पावर जनरेटर, तटरक्षक बल के लिए डोर्नियर विमानों में आधुनिक निगरानी सिस्टम, सेना के लिए एंटी-टैंक माइंस, आर्मर्ड रिकवरी व्हीकल्स, टी-72 टैंक और बीएमपी-II वाहनों से जुड़े खरीद प्रस्तावों को भी मंजूरी (Rafale deal India) दी गई है। साथ ही स्टैंड-ऑफ ग्राउंड अटैक क्षमता बढ़ाने वाली कॉम्बैट मिसाइलें और हाई-एल्टीट्यूड स्यूडो सैटेलाइट सिस्टम (एस-एचएपीएस) भी इस पैकेज का हिस्सा हैं।

गौरतलब है कि भारतीय वायुसेना की स्क्वाड्रन संख्या फिलहाल स्वीकृत 42 के मुकाबले घटकर करीब 30 रह गई है। 2016 में खरीदे गए 36 राफेल के दो स्क्वाड्रन (Rafale deal India) पहले से सेवा में हैं। अब 114 नए विमानों की मंजूरी को वायुसेना की परिचालन जरूरतों की दिशा में एक निर्णायक कदम माना जा रहा है, जिसका असर आने वाले वर्षों तक भारत की सुरक्षा रणनीति पर दिखाई देगा।

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