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सैनिकों का मनोबल मत तोड़ो; पहलगाम हमले की जांच की मांग करने वालों को सुप्रीम कोर्ट ने लगाई फटकार…

-सुप्रीम कोर्ट ने पहलगाम आतंकी हमले के संबंध में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई से किया इंकार

नई दिल्ली। pahalgam terror attack: पहलगाम आतंकी हमले को लेकर दायर जनहित याचिका पर गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। सुप्रीम कोर्ट ने पहलगाम आतंकी हमला मामले की सुनवाई से इनकार कर दिया। न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति एन कोटिश्वर सिंह की पीठ के समक्ष सुनवाई हुई। पहलगाम हमले की जांच के लिए सर्वोच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक न्यायिक आयोग की स्थापना की मांग की गई। इसके अलावा, केंद्र, जम्मू-कश्मीर, सीआरपीएफ, एनआईए को जम्मू-कश्मीर के पर्यटन क्षेत्र में नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कार्य योजना तैयार करने का निर्देश देने को भी कहा गया। हालाँकि, सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया है।

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भविष्य में ऐसे मुद्दे अदालत में नहीं लाए

पहलगाम आतंकी हमले से जुड़ी याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ी टिप्पणी की। पहलगाम हमले की जांच की मांग को लेकर एक जनहित याचिका दायर की गई। अदालत ने जनहित याचिकाकर्ताओं से पहलगाम आतंकवादी हमले के बारे में सवाल पूछे। क्या आप सुरक्षा बलों का मनोबल गिराना चाहते हैं? सुप्रीम कोर्ट ने यह सवाल पूछा। अदालत ने यह भी निर्देश दिया है कि भविष्य में ऐसे मुद्दे अदालत में नहीं लाए जाने चाहिए। सर्वोच्च न्यायालय ने इस याचिका को खारिज कर दिया।

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भारतीय आतंकवाद से लडऩे के लिए एकजुट

याचिकाकर्ता को फटकार लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा ऐसी जनहित याचिका दायर करने से पहले जिम्मेदारी से काम लें। आपका अपने देश के प्रति कुछ कर्तव्य है। यह ऐसा समय है जब हर भारतीय आतंकवाद (pahalgam terror attack) से लडऩे के लिए एकजुट हुआ है। इसलिए हमारी सेना का मनोबल न गिराएं। यह सही समय नहीं है और इस मामले की संवेदनशीलता देखिए। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि न्यायाधीशों का काम विवादों का निपटारा करना है, जांच करना नहीं।

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याचिका वापस लेने की अनुमति

अदालत ने याचिकाकर्ता से कहा हमारे पास जांच करने का कौशल कब से है? आप सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीशों से जांच करने के लिए कह रहे हैं। वे केवल फैसला दे सकते हैं। हमें आदेश देने के लिए मत कहिए। सुप्रीम कोर्ट ने कहा क्या आप जो अनुरोध कर रहे हैं, उसके बारे में आप निश्चित हैं? सबसे पहले आप सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीशों से जांच करने के लिए कहते हैं। वे जांच नहीं कर सकते। फिर आप दिशा-निर्देश, मुआवजा और फिर प्रेस काउंसिल को निर्देश देने के लिए कहते हैं। आप हमें रात में ये सब पढऩे के लिए मजबूर कर रहे हैं। याचिका वापस लेने की अनुमति देते हुए अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता जम्मू-कश्मीर में छात्रों के सामने आ रही समस्याओं के संबंध में संबंधित उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटा सकते हैं।

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