Assam Election 2026 : चाय बागानों में मजदूरों के साथ पत्तियां तोड़ती दिखीं कल्पना सोरेन, टॉर्च की रोशनी में गरीब का घर देख ठिठक गए सीएम हेमंत

असम विधानसभा चुनाव 2026 का पारा अपने चरम पर है, और इस चुनावी दंगल में अब झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और कद्दावर नेता कल्पना सोरेन की एंट्री ने मुकाबले को बेहद दिलचस्प (Assam Election 2026) बना दिया है।
झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के इन दोनों दिग्गज नेताओं ने असम के चाय बागानों में पहुंचकर न केवल मजदूरों का दिल जीता, बल्कि वहां की जमीनी हकीकत दिखाते हुए सत्तारूढ़ भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है। चाय की पत्तियां तोड़ते और मजदूरों के कच्चे घरों में वक्त बिताते इन नेताओं की तस्वीरें सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रही हैं।
मजदूर के घर में अंधेरा देख हैरान रह गए मुख्यमंत्री (Assam Election 2026)
चुनावी दौरे के दौरान एक भावुक कर देने वाला मंजर तब सामने आया जब मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन एक चाय बागान मजदूर के कच्चे मकान में पहुंचे। बताया जा रहा है कि घर के भीतर इतना अंधेरा था कि मुख्यमंत्री को टॉर्च की रोशनी का सहारा लेना पड़ा। वहां की बदहाली देखकर सीएम सोरेन दंग रह गए।
उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा कि असम में चाय बागान मजदूरों की स्थिति अत्यंत चिंताजनक है। उन्होंने आरोप लगाया कि डबल इंजन की सरकार होने के बावजूद यहां गरीबों के पास न पक्के मकान हैं और न ही बिजली जैसी बुनियादी सुविधाएं।
कल्पना सोरेन ने तोड़ी चाय की पत्तियां, मजदूरों के साथ ली सेल्फी
झारखंड की राजनीति में अपनी सक्रियता से लोहा मनवा चुकीं विधायक कल्पना सोरेन असम में भी बेहद सहज अंदाज (Assam Election 2026) में नजर आईं। उन्होंने चाय बागान की महिला मजदूरों के साथ बैठकर न सिर्फ उनकी समस्याएं सुनीं, बल्कि टोकरी पीठ पर लादकर चाय की पत्तियां भी तोड़ीं।
कल्पना सोरेन ने मजदूरों के साथ सेल्फी ली और उनके साथ घुल-मिलकर उनकी सामाजिक और आर्थिक स्थिति की जानकारी ली। सोशल मीडिया पर साझा की गई उनकी इन तस्वीरों को लोग ‘जमीनी नेतृत्व’ का उदाहरण बता रहे हैं।
असम में ‘अबुआ आवास’ और ‘मुफ्त बिजली’ का वादा
हेमंत सोरेन ने असम की जनता के बीच झारखंड सरकार की सफल योजनाओं का जमकर बखान किया। उन्होंने कहा कि झारखंड में हम ‘अबुआ आवास योजना’ के जरिए हर गरीब को तीन कमरों का पक्का मकान (Assam Election 2026) दे रहे हैं और 200 यूनिट मुफ्त बिजली का लाभ मिल रहा है।
उन्होंने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि यहां के आदिवासी समाज का इस्तेमाल सिर्फ वोट बैंक के लिए किया गया है। सीएम ने दावा किया कि यदि असम में झामुमो को मजबूती मिलती है, तो वे झारखंड की तर्ज पर ही यहां जन-कल्याणकारी योजनाएं लागू करेंगे।
चुनावी रणनीति या इमोशनल कार्ड?
सियासी गलियारों में सोरेन दंपत्ति के इस दौरे को एक सोची-समझी चुनावी रणनीति माना जा रहा है। असम में एक बड़ी आबादी उन आदिवासियों की है जिनका मूल नाता झारखंड और ओडिशा से रहा है।
ऐसे में हेमंत और कल्पना सोरेन का सीधे मजदूरों के घरों तक पहुंचना भाजपा के गढ़ में सेंध लगाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। अब देखना यह होगा कि चाय बागानों से उठी यह लहर असम चुनाव के नतीजों में क्या बदलाव लाती है।



