Army Land Excavation : सेना की जमीन से मुरुम चोरी का खुलासा, हाई कोर्ट सख्त, 54 बिल्डर्स पर गिरी कार्रवाई की गाज
बिलासपुर में छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने चकरभाठा-तेलसरा क्षेत्र में एयरपोर्ट के समीप सेना की जमीन से अवैध मुरुम खुदाई के मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए खनिज विभाग को कार्रवाई जारी रखने (Army Land Excavation) के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने इस गंभीर प्रकरण को अब मॉनिटरिंग पर रखते हुए स्पष्ट किया है कि किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
सुनवाई के दौरान यह तथ्य सामने आया कि दो निजी कंस्ट्रक्शन कंपनियों के माध्यम से सेना की भूमि से भारी मात्रा में मुरुम निकाली गई और इसका उपयोग 54 से अधिक बिल्डर्स और ठेकेदारों द्वारा निर्माण कार्यों में किया गया। यह मुरुम आसपास बन रही कॉलोनियों और सड़कों में खपाई गई।
दो कंस्ट्रक्शन कंपनियां जांच के घेरे में
मामले में शहर की दो प्रमुख निर्माण कंपनियां डिवाइन ग्रुप और फॉर्च्यून एलीमेंट का नाम (Army Land Excavation) सामने आया है। इन कंपनियों पर आरोप है कि उन्होंने निर्माण कार्यों के लिए सेना की जमीन से अवैध रूप से मुरुम खुदाई कराई। इस मामले में हाई कोर्ट ने दिसंबर 2024 में स्वतः संज्ञान लेते हुए जनहित याचिका के रूप में सुनवाई शुरू की थी।
पिछली सुनवाई के दौरान राज्य शासन की ओर से 25 दिसंबर 2024 को जारी पत्र अदालत में प्रस्तुत किया गया था, जो खनिज अधिकारी बिलासपुर द्वारा बिल्डर पवन अग्रवाल को भेजा गया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट ने फॉर्च्यून एलीमेंट कॉलोनी के मालिक पवन अग्रवाल को पक्षकार बनाने के निर्देश भी दिए थे।
मुरुम की बिक्री भी उजागर
सुनवाई में यह भी सामने आया कि अवैध रूप से निकाली गई मुरुम सिर्फ निजी निर्माण तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसकी बिक्री भी की गई। इस मुरुम का इस्तेमाल अन्य ठेकेदारों और बिल्डर्स ने किया, जिनकी संख्या करीब 54 बताई गई है। खनिज नियमों के तहत इन सभी पर कार्रवाई की जा चुकी है।
सेना ने पहले ही की थी शिकायत
केंद्र सरकार की ओर से पैरवी कर रहे डिप्टी सॉलिसिटर जनरल रमाकांत मिश्रा ने कोर्ट को बताया कि सेना की भूमि से अवैध खनन को लेकर पहले ही कलेक्टर बिलासपुर से शिकायत की जा चुकी थी। इसके बावजूद गतिविधियां जारी रहीं, जिस पर अब सख्त कदम उठाए जा रहे हैं।
हाई कोर्ट ने खनिज विभाग से अब तक की गई जांच और कार्रवाई की विस्तृत जानकारी (Army Land Excavation) लेते हुए मामले को मॉनिटरिंग में रखा है। जनहित याचिका की अगली सुनवाई के लिए 20 अप्रैल की तारीख तय की गई है। यह मामला अब सिर्फ अवैध खनन का नहीं, बल्कि सेना की जमीन की सुरक्षा और प्रशासनिक जवाबदेही का भी बड़ा सवाल बन चुका है।
