Andaman Bridge Connectivity : समुद्र के ऊपर उम्मीदों की राह, आज़ाद हिंद सेतु की कहानी

Andaman Bridge Connectivity

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नीले समुद्र की शांत सतह पर दूर तक फैली कंक्रीट और इस्पात की वह लंबी रेखा अब केवल एक पुल नहीं रही, बल्कि अंडमान की बदलती रफ्तार का प्रतीक (Andaman Bridge Connectivity) बन चुकी है। उत्तर अंडमान और मध्य अंडमान को जोड़ने वाला आज़ाद हिंद सेतु आज द्वीपसमूह में बेहतर संपर्क, सुगम यात्रा और नई संभावनाओं का मजबूत आधार बन गया है।

एक दौर ऐसा भी था, जब इन दोनों द्वीपों के बीच सफर का मतलब फेरी का लंबा इंतज़ार, मौसम की अनिश्चितता और घंटों की देरी होता था। यात्रियों की लंबी कतारें, वाहन चालकों की चिंता और रोज़मर्रा के कामों में होने वाली बाधाएं यहां की सामान्य तस्वीर थीं। लेकिन अप्रैल 2017 में शुरू हुई इस महत्वाकांक्षी परियोजना ने धीरे-धीरे उस तस्वीर को बदलना शुरू किया। मार्च 2020 में सेतु के पूरा होते ही, द्वीपों के बीच की दूरी जैसे सिमट गई।

हाल ही में अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह के दौरे पर पहुंचे रायपुर (छत्तीसगढ़) के पत्रकारों के एक दल ने आज़ाद हिंद सेतु का निरीक्षण किया। समुद्र के ऊपर फैली लगभग 1.45 किलोमीटर लंबी इस संरचना को नज़दीक से देखते हुए उन्होंने न केवल इसकी भव्यता को महसूस किया, बल्कि इसके सामाजिक और आर्थिक प्रभावों को भी समझा।

Andaman Bridge Connectivity
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“यह पुल सिर्फ रास्ता नहीं, बदलाव है”

दौरे के दौरान पत्रकारों से बातचीत में पीएमयू भारत की प्रबंधक रुतला यमुना ने सेतु की उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए कहा, “आज़ाद हिंद सेतु ने लोगों के जीवन को वास्तविक अर्थों में आसान (Andaman Bridge Connectivity) बनाया है। जहां पहले आवागमन पूरी तरह फेरी सेवाओं पर निर्भर था, वहीं अब यात्रा तेज़, सुरक्षित और समयबद्ध हो गई है। यह बदलाव केवल सुविधा तक सीमित नहीं है, बल्कि क्षेत्रीय विकास से भी गहराई से जुड़ा है।”

निर्माण की चुनौतियां, मजबूत संकल्प

निर्माण प्रक्रिया की जटिलताओं का ज़िक्र करते हुए उन्होंने बताया कि द्वीपीय परियोजनाओं की अपनी विशिष्ट चुनौतियां होती हैं। “संरचनात्मक इस्पात सहित अधिकांश निर्माण सामग्री मुख्यभूमि भारत से लाई गई। इस परियोजना के लिए चेन्नई प्रमुख लॉजिस्टिक केंद्र रहा। समुद्री परिवहन, मौसम की अनिश्चितता और आपूर्ति प्रबंधन के बीच संतुलन बनाते हुए समय पर परियोजना को पूरा करना अपने आप में बड़ी उपलब्धि थी।”

Andaman Bridge Connectivity
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आम लोगों के जीवन में दिख रहा असर

सेतु का प्रभाव अब स्थानीय जीवन में साफ नजर आता है। ईंधन, पेयजल, चिकित्सा आपूर्ति और रोज़मर्रा की आवश्यक वस्तुओं की आवाजाही कहीं अधिक सुचारु (Andaman Bridge Connectivity) हो गई है। स्वास्थ्य सेवाओं, शैक्षणिक संस्थानों, बाज़ारों और प्रशासनिक केंद्रों तक पहुंच पहले की तुलना में आसान और भरोसेमंद हो चुकी है। इससे स्थानीय समुदायों में आत्मविश्वास बढ़ा है और नए अवसरों के द्वार खुले हैं।

टोल और भविष्य की योजनाएं

टोल व्यवस्था को लेकर रुतला यमुना ने स्पष्ट किया, “सेतु टोल-मुक्त नहीं है, लेकिन यात्रा समय में बचत और परिवहन की विश्वसनीयता जैसे फायदे उपयोग शुल्क से कहीं अधिक हैं।” भविष्य की योजनाओं की ओर संकेत करते हुए उन्होंने बताया कि NHIDCL द्वारा मध्य अंडमान क्षेत्र में एक और रणनीतिक सेतु परियोजना (Andaman Bridge Connectivity) पर काम जारी है, जिसे अप्रैल 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

समुद्र के बीच खड़ा आज़ाद हिंद सेतु अब केवल द्वीपों को नहीं, बल्कि लोगों की उम्मीदों, सपनों और विकास की आकांक्षाओं को भी जोड़ रहा है। यह सेतु इस बात का प्रमाण है कि जब संपर्क मजबूत होता है, तो दूरियां केवल नक्शों तक ही सीमित रह जाती हैं।

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