
छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित रामावतार जग्गी हत्याकांड में उम्रकैद की सजा पाए अमित जोगी का मामला अब देश की सबसे बड़ी अदालत की दहलीज (Amit Jogi Supreme Court) पर पहुंच गया है।
सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में हुई अहम सुनवाई के बाद जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संजीव मेहता की डिवीजन बेंच ने इस मामले की अंतिम सुनवाई के लिए 20 अप्रैल 2026 की तारीख तय कर दी है। कोर्ट ने जोगी को निर्देश दिया है कि वे 20 अप्रैल से पहले अपनी मुख्य याचिका (SLP) विधिवत दायर कर दें ताकि सभी पहलुओं पर एक साथ फैसला लिया जा सके।
दिग्गज वकीलों की फौज और ‘प्राकृतिक न्याय’ की दलील (Amit Jogi Supreme Court)
अमित जोगी की ओर से देश के नामचीन वकीलों कपिल सिब्बल, मुकुल रोहतगी, विवेक तन्खा और सिद्धार्थ दवे ने पैरवी की। जोगी के वकीलों ने सुप्रीम कोर्ट के सामने दलील दी कि बिलासपुर हाईकोर्ट ने सजा सुनाते वक्त ‘प्राकृतिक न्याय’ (Natural Justice) के सिद्धांतों की अनदेखी की है।
वकीलों का आरोप है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा 6 नवंबर 2025 को दिए गए स्पष्ट निर्देशों के बावजूद, अमित जोगी को अपनी बात रखने का उचित अवसर दिए बिना ही फैसला सुना दिया गया।
हाईकोर्ट के फैसले की प्रक्रिया पर उठाए सवाल
सुनवाई के दौरान यह तथ्य भी सामने रखा गया कि बिलासपुर हाईकोर्ट का 2 अप्रैल 2026 का विस्तृत फैसला, जिसके पैरा 37 में कथित तौर पर यह दर्ज है कि यह बिना जोगी को सुने पारित (Amit Jogi Supreme Court) किया गया, वह आज सुबह ही वेबसाइट पर अपलोड हुआ है।
जोगी पक्ष ने अदालत को बताया कि उन्हें इस संबंध में रजिस्ट्रार (न्यायिक) द्वारा फोन पर सूचित किया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने अब इन सभी तकनीकी और कानूनी बिंदुओं को देखते हुए 20 अप्रैल को संयुक्त रूप से अंतिम सुनवाई करने का निर्णय लिया है।
“सत्य की जीत होगी”, अमित जोगी का भावुक वीडियो
सुप्रीम कोर्ट से सुनवाई की तारीख तय होने के तुरंत बाद जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) के नेता अमित जोगी ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा किया। वीडियो में उन्होंने न्यायपालिका पर भरोसा जताते हुए कहा: – “मैं माननीय सर्वोच्च न्यायालय के इस आदेश का हृदय से स्वागत करता हूँ। मुझे पूरा विश्वास है कि मेरे साथ जो गंभीर अन्याय हुआ है, उसे अब सुधारा जाएगा। सत्य और न्याय की जीत अवश्य होगी।”
क्या है पूरा मामला?
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के नेता राम अवतार जग्गी की 2003 में हुई हत्या के मामले में हाल ही में बिलासपुर हाईकोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को पलटते (Amit Jogi Supreme Court) हुए अमित जोगी को मुख्य साजिशकर्ता मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। अब सबकी नजरें 20 अप्रैल पर टिकी हैं, जब यह तय होगा कि जोगी को राहत मिलती है या उनकी मुश्किलें और बढ़ेंगी।



