Aman Saw Gang Case : इंटरनेशनल कॉल, सीक्रेट कोड और दहशत… आज कोर्ट पहुंचेगा मयंक
Aman Saw Gang Case
झारखंड के कुख्यात गैंग्स्टर अमन साव और उसके सहयोगी मयंक सिंह उर्फ सुनील मीणा द्वारा संचालित रंगदारी वसूली का नेटवर्क अत्यंत संगठित और हाईटेक तरीके से चलाया जा रहा था। पुलिस जांच में यह सामने आया है कि गैंग विभिन्न राज्यों के लिए अलग-अलग कोडवर्ड तय करता था, जिनके जरिए कारोबारियों से प्रोटेक्शन मनी वसूलने और आपात स्थितियों में सदस्यों को अलर्ट किया जाता था (Aman Saw Gang Case)।
पुलिस के अनुसार छत्तीसगढ़ के लिए “2929” कोड निर्धारित किया गया था, जिसका उपयोग विशेष रूप से आपात स्थिति या पुलिस कार्रवाई की सूचना देने के लिए किया जाता था। गैंग का संचालन इस तरह किया जाता था कि किसी भी सामान्य बातचीत या स्पष्ट शब्दों से बचा जाए, ताकि कानून एजेंसियों को भनक न लग सके (Aman Saw Gang Case)।
चार दिन की पुलिस रिमांड पर चल रहे मयंक सिंह की रिमांड अवधि शनिवार को समाप्त हो रही है, जिसके बाद उसे कोर्ट में पेश किया जाएगा। पुलिस मयंक से और जानकारी हासिल करने के लिए पुनः रिमांड की मांग करने की तैयारी कर रही है (Aman Saw Gang Case)।
जांच के दौरान गिरफ्तार मयंक सिंह ने खुलासा किया कि गैंग के सदस्य आम कॉल या सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का उपयोग नहीं करते थे। वे सिग्नल और जंगी जैसे सुरक्षित ऐप्स के माध्यम से ही आपस में संपर्क रखते थे। इन ऐप्स पर भी केवल कोडवर्ड में ही बातचीत होती थी, जिससे बातचीत का असली मतलब छिपा रहे (Aman Saw Gang Case)।
मयंक सिंह ने पुलिस को बताया कि जिस राज्य में गैंग सक्रिय होता था, उसके लिए अलग कोड तय रहता था। यदि किसी सदस्य की गिरफ्तारी होती या पुलिस का दबाव बढ़ता, तो ग्रुप में केवल वही कोड भेजा जाता था, जिससे सभी सदस्य सतर्क हो जाते थे। किसी ऑपरेशन के सफल होने पर भी अलग संकेत कोड का प्रयोग किया जाता था (Aman Saw Gang Case)।
पूछताछ में मयंक ने यह भी स्वीकार किया कि वह अंतरराष्ट्रीय नंबरों से कॉल कर कारोबारियों में दहशत फैलाने की कोशिश करता था। हालांकि रायपुर में किसी कारोबारी से प्रोटेक्शन मनी वसूलने में वह सफल नहीं हो सका। पुलिस का मानना है कि पूछताछ आगे बढ़ने पर गैंग के नेटवर्क से जुड़े और भी अहम खुलासे हो सकते हैं।
