Ajay Chandrakar Statement : कार्रवाई की चर्चाओं के बीच चंद्राकर का पलटवार, अफवाहों पर बयान ने सियासत गरमा दी

राजनीति के गलियारों में अचानक उठी हलचल ने कई सवाल खड़े (Ajay Chandrakar Statement) कर दिए थे। कार्रवाई, जांच और दबाव की चर्चाएं तेज थीं, लेकिन भीतरखाने कुछ और ही कहानी चल रही थी। सामने आया सच उन लोगों के लिए असहज था, जो लंबे समय से परदे के पीछे रहकर माहौल बनाने की कोशिश कर रहे थे।
रायपुर। वरिष्ठ भाजपा नेता अजय चंद्राकर ने अपने निवास पर मीडिया से बातचीत के दौरान स्पष्ट शब्दों में कहा कि उनके यहां ईडी रेड की खबर पूरी तरह फर्जी है। उन्होंने कहा कि उनके खिलाफ तरह-तरह की बातें फैलाई जा रही हैं या जानबूझकर चलाई जा रही हैं, लेकिन वे राजनीति में लड़ना जानते हैं और किसी भी चुनौती का सामना करने में सक्षम हैं।
चंद्राकर ने विरोधियों पर तीखा हमला करते हुए कहा कि राजनीति में आमने-सामने की लड़ाई (Ajay Chandrakar Statement) होती है, कमर के नीचे वार को वे संघर्ष नहीं मानते। उन्होंने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा कि युद्ध में हमेशा सामने से गोली चलती है, अब देखना यह है कि पहल कौन करता है। उनके इस बयान को मौजूदा सियासी माहौल में काफी अहम माना जा रहा है।
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के चयन को लेकर उन्होंने भरोसा जताया कि नितिन नबीन की टीम में छत्तीसगढ़ के नेताओं को आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा। उन्होंने कहा कि नितिन नबीन राज्य के नेताओं की क्षमता और मेहनत से भली-भांति परिचित हैं, जिसका लाभ आने वाले समय में जरूर दिखेगा।
डीएड-बीएड अभ्यर्थियों के प्रदर्शन पर प्रतिक्रिया देते हुए चंद्राकर ने कहा कि उन्हें यह पहली बार सुनने को मिला है कि इस तरह का आंदोलन (Ajay Chandrakar Statement) हो रहा है। उन्होंने साफ कहा कि नियुक्तियां सरकार की प्रक्रिया के अनुसार निकलती हैं, विज्ञापन जारी होता है और अभ्यर्थी आवेदन करते हैं, इसमें भ्रम फैलाने की जरूरत नहीं है।
‘जी राम जी’ को लेकर कांग्रेस की आपत्ति पर उन्होंने कहा कि कांग्रेस को अगर आपत्ति है तो वह बिंदुवार बहस करे। सरकार से बहस नहीं कर सकते तो वे स्वयं चर्चा के लिए तैयार हैं। चंद्राकर ने कहा कि कांग्रेस के निराधार आरोपों का जवाब देना उनकी मजबूरी नहीं है, हर कानून और योजना में समय के साथ सुधार और बदलाव होते हैं।
मनरेगा का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि पहले विधेयक में राज्यों को नाम जोड़ने का अधिकार था और उसी आधार पर छत्तीसगढ़ रोजगार गारंटी योजना लिखा गया। बाद में कांग्रेस की आपत्ति के बाद उसमें महात्मा गांधी का नाम जोड़ा गया। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस को छत्तीसगढ़ के नाम से ही आपत्ति है, और जो लोग राज्य की पहचान से घृणा करते हैं, उनकी राजनीति ज्यादा दिन नहीं चलती।



