AIIMS Obesity Report : युवाओं के लिए चेतावनी – वजन का असर सिर्फ शरीर पर नहीं, दिमाग भी हो रहा है बीमार
AIIMS Obesity Report
तेजी से बदलती लाइफस्टाइल और सोशल मीडिया के दबाव के बीच भारत के युवा एक ऐसे खतरे की ओर बढ़ रहे हैं, जो दिखता कम और नुकसान ज्यादा (AIIMS Obesity Report) करता है। ताजा रिपोर्ट में सामने आया है कि बढ़ता या जरूरत से ज्यादा घटा हुआ वजन केवल शारीरिक बीमारी नहीं, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य पर भी गहरा असर डाल रहा है। एम्स और आईसीएमआर की साझा स्टडी ने इस बात की पुष्टि की है कि मोटापा और अंडरवेट—दोनों ही स्थितियां युवाओं को मानसिक तनाव की ओर धकेल रही हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, जरूरत से ज्यादा मोटे और बहुत अधिक पतले युवा अपने शरीर को लेकर लगातार दबाव महसूस कर रहे हैं। इसी मानसिक स्थिति को बॉडी इमेज डिस्ट्रेस कहा जाता है। अध्ययन में पाया गया कि मोटापे से जूझ रहे लगभग आधे युवा हर समय एंग्जाइटी में रहते हैं, वहीं कम वजन वाले युवाओं में अकेलापन, शर्मिंदगी और आत्मविश्वास की कमी ज्यादा देखी गई।
विशेषज्ञों का कहना है कि आज का युवा अपने शरीर को दूसरों की नजर से देखने लगा है। हर चौथा युवा खुद को लगातार जज किए जाने का एहसास करता है, जिससे धीरे-धीरे स्ट्रेस और डिप्रेशन जैसी समस्याएं (AIIMS Obesity Report) जन्म लेती हैं। यह स्थिति केवल ओवरवेट तक सीमित नहीं है, बल्कि अंडरवेट युवाओं के लिए भी उतनी ही गंभीर बनती जा रही है।
एम्स की रिपोर्ट यह भी इशारा करती है कि देश की स्वास्थ्य नीतियों में मोटापे पर तो चर्चा होती है, लेकिन कम वजन से जुड़ी मानसिक परेशानियों को अब भी नजरअंदाज किया जा रहा है। जबकि सच्चाई यह है कि दोनों ही स्थितियां मानसिक संतुलन को बिगाड़ सकती हैं और युवाओं के सामाजिक जीवन पर गहरा असर डालती हैं।
नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे के आंकड़े भी चिंता बढ़ाने वाले हैं। हर चार में से एक व्यक्ति मोटापे की श्रेणी में आ चुका है और बीते 15 वर्षों में यह आंकड़ा दोगुना हो गया है। खासतौर पर पेट के आसपास जमा चर्बी भारत में एक बड़ी समस्या बनती जा रही है, जो दिल, लिवर, पैंक्रियाज और किडनी जैसे अंदरूनी अंगों को भी प्रभावित कर रही है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ मानते हैं कि वजन को लेकर जरूरत से ज्यादा चिंता करने के बजाय संतुलन पर ध्यान देना जरूरी है। परफेक्ट बॉडी का मतलब न तो अत्यधिक पतला होना है और न ही जरूरत से ज्यादा (AIIMS Obesity Report) भारी। सही खानपान, नियमित दिनचर्या, पर्याप्त नींद और मानसिक शांति—यही स्वस्थ शरीर और दिमाग की असली कुंजी है।
रिपोर्ट के जरिए युवाओं को यह संदेश दिया गया है कि वजन सिर्फ दिखावे का मुद्दा नहीं, बल्कि मानसिक सेहत से गहराई से जुड़ा विषय है। समय रहते अगर इस पर ध्यान नहीं दिया गया, तो आने वाले वर्षों में मानसिक बीमारियों का बोझ और बढ़ सकता है।
