संपादकीय: एआई समिट एक बड़ी उपलब्धि

AI Summit a major achievement

AI Summit a major achievement

Editorial: देश की राजधानी नई दिल्ली में दुनिया के पहले एआई समिट का सफल आयोजनन भारत के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। इस समिट को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ठीक ही कहा है कि एआई की कमांड हमें अपने हाथों में रखनी होगी और इसे सही दिशा देनी होगी। वास्तव में एआई एक नई टैक्नोलॉजी है जिसका मानव कल्याण के हित में सदुउपयोग करके इसे विकास का नया मॉडल बनाया जा सकता है और कृषि क्षेत्र के अलावा कौशल विकास के क्षेत्र में भी विकास के नये आयाम स्थापित किये जा सकते हैं। इससे आम नागरिकों की रोजमर्रा की जरूरतों को भी और बेहतर ढंग से पूरा किया जा सकता है।

भारतीय आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने उम्मीद जाहिर की है कि आगामी दो वर्षों में भारत के एआई क्षेत्र में दो सौ अरब डॉलर से भी अधिक का निवेश हो सकता है और इसके जरिए रोजगार के नए अवसर खुल सकते हैं। भारत अभी भी दुनिया के तीन सबसे बड़े एआई देशों में एक है और इसके सर्वोच्च स्थान पर पहुंचने की असीम संभावनाएं हैं। भारत दुनिया का सबसे युवा आबादी वाला देश है और हमारे युवाओं में कुछ नया करने की प्रतिभा तथा क्षमता है। बस उसे समुचित अवसर उपलब्ध कराने की आवश्यकता है।

भारत में आयोजित एआई समिट से आर्टिफिशियल इंटेलिजेन्स के क्षेत्र में युवाओं को नया अवसर मिलेगा और उनकी प्रतिभा का सही उपयोग हो पाएगा। इसी एआई समिट में गलगोटिया युनिर्वसीटी में चीनी रोबो डॉग को अपनी युनिर्वसीटी का इजाद बताते हुए भारत को जगहसाई का पात्र बना दिया जिसकी वजह से एआई समिट के उजले दामन पर दाग लग गया। गलगोटिया युनिर्वसीटी में हालांकि बाद में यह सफाई दी है कि उसने चायनिज रोबो डॉग को अपनी यूनिवर्सीटी की इजाद नहीं बताया था लेकिन तब तक सांप निकल चुका था और बाद में लकीर पिटने का कोई फायदा नहीं हुआ।

सरकार ने भी गलगोटिया यूनिवर्सीटी को तत्काल प्रभाव से एआई समिट से खदेड़ दिया लेकिन उसने जो कृत्य किया है उसके लिए कायदे से तो उस यूनिवर्सीटी की मान्यता ही रद्द की जानी चाहिए। गौरतलब है कि देश में गलगोटिया यूनिवर्सीटी की तरह ही और भी कई नीजि विश्वविद्यालय कुकुरमुत्तों की तरह उगते जा रहे हैं। जहां सिर्फ छात्रों को उज्जवल भविष्य के सपने दिखाकर उन्हें दोनों हाथों से लूटा जाता है।

यही नहीं बल्कि वे सरकार से भी मनमाना ग्रांट हासिल कर लेते हैं ऐसी तमाम संदिग्ध यूनिवर्सीटियों के कामकाज की समीक्षा की जानी चाहिए ताकि भविष्य में गलगोटिया यूनिवर्सीटी की तरह कोई अन्य यूनिवर्सीटीइस तरह का फर्जीवाडा करने का दुहसाहस न करे। यदि हम भारत को विश्व गुरू बनाना चाहते हैं तो यह निहायत जरूरी है कि बच्चों को उच्च शिक्षा देने वाले संस्थान उत्कृष्ट हों। आज तो स्थिति यह है कि जेएनयू और डीयू जैसे सरकारी शिक्षण संस्थान भी राजनीतिक का अखाड़ा बन गये हैं जब तक इनमें सुधार नहीं होगा तब तक उच्च शिक्षा की गुणवत्ता भी बेहतर नहीं हो पाएगी।

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