छत्तीसगढ़

Agrasen Steel Plant Controversy : असहमति को काट बनाया सहमति, फर्जी NOC के खिलाफ भूख हड़ताल पर बैठे हजारों ग्रामीण

विकास की आड़ में जब जालसाजी का आरोप लगे, तो जनमानस का आक्रोश सड़कों (Agrasen Steel Plant Controversy) पर उतर ही आता है। कुछ ऐसा ही मंजर तिल्दा ब्लॉक के देवरी पंचायत में देखने को मिल रहा है, जहाँ अग्रसेन स्टील एंड पावर प्लांट की स्थापना को लेकर विवाद अब आर-पार की जंग में तब्दील हो गया है।

देवरी और घुलघुल गांव के हजारों ग्रामीण कड़ाके की धूप और सर्द रातों की परवाह किए बिना ‘भूख हड़ताल’ पर बैठ गए हैं। ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि जिस एनओसी (NOC) के दम पर यह प्लांट खड़ा किया जा रहा है, वह कागजी हेरफेर और धोखाधड़ी की उपज है।

एक अक्षर का खेल और दांव पर पूरा गांव (Agrasen Steel Plant Controversy)

ग्रामीणों ने दस्तावेजी सबूतों का हवाला देते हुए एक चौंकाने वाला खुलासा किया है। उनका आरोप है कि ग्राम पंचायत ने शुरुआत में प्लांट के खिलाफ ‘असहमति’ का प्रस्ताव पारित किया था। लेकिन भ्रष्टाचार का खेल ऐसा चला कि प्रस्ताव में लिखे ‘असहमति’ शब्द से चालाकी के साथ ‘अ’ अक्षर को विलोपित कर दिया गया और उसे ‘सहमति’ में बदलकर शासन-प्रशासन के सामने पेश कर दिया गया।

ग्रामीणों का कहना है कि सरपंच दिव्या राजा वर्मा और सचिव की मिलीभगत से यह फर्जीवाड़ा हुआ है। इस धोखाधड़ी के खिलाफ कलेक्टर और एसडीएम से लेकर थाने तक शिकायत की गई, लेकिन कार्रवाई सिफर रही।

विधायक और मंत्री की ‘मजबूरी’ पर उठे सवाल

आंदोलनकारियों का गुस्सा स्थानीय जनप्रतिनिधियों पर भी फूट (Agrasen Steel Plant Controversy) रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि वे अपनी गुहार लेकर स्थानीय विधायक और कैबिनेट मंत्री टंक राम वर्मा के पास भी गए थे।

आरोप है कि मंत्री जी ने यह कहकर पल्ला झाड़ लिया कि “मेरे ऊपर भी लोग हैं, मैं अब न विरोध कर सकता हूं और न ही आंदोलन में शामिल हो सकता हूं।” जनसेवक के इस बयान ने ग्रामीणों के बीच अविश्वास की खाई को और गहरा कर दिया है।

‘मैं बिकी नहीं हूं, बस व्यस्त थी’ – जिला पंचायत सदस्य

जब इस पूरे मामले पर जिला पंचायत सदस्य लक्ष्मी वर्मा से तीखे सवाल पूछे गए, तो उन्होंने ग्रामीणों द्वारा लगाए गए ‘बिकने’ के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया।

उन्होंने कहा, “ग्रामीणों की मांगें जायज हैं और मैं उनके संपर्क में हूं। केवल व्यस्तता के चलते धरना स्थल नहीं पहुंच पाई, इसका यह मतलब नहीं कि मैं किसी के पक्ष में झुक गई हूं। मैंने अधिकारियों से इस संबंध में मौखिक चर्चा की है।”

सरपंच के घर ‘सवालों’ पर पहरा

हैरानी की बात तब हुई जब इस पूरे विवाद की मुख्य कड़ी, सरपंच दिव्या राजा वर्मा से पक्ष जानने की कोशिश (Agrasen Steel Plant Controversy) की गई। उनके नंबर पर कॉल करने पर उनके पति पुनेश्वर वर्मा ने फोन उठाया और दो टूक शब्दों में कह दिया कि “वह सरपंच हैं, मैं नहीं… लेकिन मैं न उनका नंबर दे सकता हूं और न ही उनसे बात करा सकता हूं।” सरपंच पति का यह टालमटोल वाला रवैया कई अनसुलझे सवालों को जन्म दे रहा है।

ग्रामीणों का संकल्प: जब तक न्याय नहीं, तब तक हटना नहीं

हाथों में तख्तियां लिए, नारेबाजी करते ग्रामीणों का स्पष्ट कहना है कि वे दलालों और फर्जीवाड़े के दम पर अपने गांव की जमीन और आबोहवा को प्रदूषित नहीं होने देंगे। भूख हड़ताल पर बैठे बुजुर्गों और युवाओं ने चेतावनी (Agrasen Steel Plant Controversy) दी है कि जब तक फर्जी एनओसी जारी करने वालों पर जेल की कार्रवाई नहीं होती और प्लांट का काम नहीं रुकता, तब तक यह सत्याग्रह जारी रहेगा।

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