संपादकीय: सीजफायर के बाद अब जुबानी जंग

Editorial: अमेरिका और ईरान के बीच जैसे तैसे सीजफायर तो हो गया है लेकिन अब दोनों के बीच जुबाली जंग शुरू हो गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर इरान को धमकी दी है कि ईरान ने समझौते को नहीं माना तो अमेरिका ने इरान के खिलाफ और बड़ी कार्यवाही करेगा हमारी महान सेना और बड़े हमले की तैयारी कर रही है। डोनाल्ड ट्रंप ने यह भी कहा है कि जब तक समझौता नहीं हो जाता तब तक खाड़ी देशों में अमेरिका की सेना तैनात रहेगी। इसके जवाब में इरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागजी ने बयान दिया है कि संघर्ष विराम के लिए ईरान की शर्तें बिलकुल साफ है। यदि उनका पालन नहीं किया गया तो इरान सीजफायर तोडऩे पर मजबूर हो जाएगा।
ईरानी विदेश मंत्री के मुताबिक सीजफायर होने के बाद भी इजराइल ने लेबनान पर अपने हमले तेज कर दिये हैं जो युद्ध विराम की शर्तों का सरासर उल्लंघन है इस पर अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेन्स ने कहा है कि ईरान को गलतफहमी हुई है। सीजफायर में लेबनान शामिल नहीं है। उनके इस बयान पर कड़ी प्रतिक्रया देते हुए ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बागर ने कहा है कि सीजफायर होने के बाद भी उसकी तीन शर्तों का उल्लंघन किया जा रहा है जिसमें इजराल द्वारा लेबनान पर हमला करना सीजफायर की शर्तों का घोर उल्लंघन है इसीलिए हम अमेरिका पर भरोसा नहीं करते क्योंकि वादों से मुकरना उसकी पुरानी आदत है। ईरान ने अभी तक होर्मूज से अपनी नाकेबंदी नहीं हटाई है।
कल सीजफायर की घोषणा होने के बाद उसने होर्मूज के चार जहाजों को छोड़ दिया लेकिन जैसे ही इजराइल ने लेबनान पर हमला किया तो इरान ने फिर से होर्मूज पर नाकेबंदी कर दी। ऐसा लगता है कि इस सीजफायर में इजराइल में लेबनान पर हमला करके पेंच फंसा दिया है। वैसे भी इजराइल अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सीजफायर वाले फैसले से नाखुश है। यह बात अलग है कि अमेरिका के दबाव में इजराइल पे अमेरिका ने सीजफायर पर अपनी सहमति जता दी है लेकिन उसने लेबनान पर अपने हमले और तेज कर दिये हैं जिसकी वजह से ईरान ने अब अमेरिका पर दबाव बढ़ाना शुरू कर दिया है और डोनाल्ड ट्रंप की धमकी के जवाब में उसे भी धमकाना शुरू कर दिया है।
यदि दोनों के बीच इसी तरह जुबानी जंग तेज होती रही तो यह सीजफायर कभी भी टूट सकता है। डोनाल्ड ट्रंप अपनी विश्वसनियता पहले ही खो चुके हैं जिस तरह वे बार बार अपनी बातों से पलटते हैं और फिर से धमकी चमकी देने पर उतारू हो जाते हैं उससे भी सीजफायर को लेकर संदेह पैदा होना स्वाभाविक है। कल ही उन्होंने फिर यह ऐलान किया था कि 40 दिनों तक चली जंग के दौरान जिन जिन देशों ने ईरान की सैन्य मदद की है उन सभी देशों पर भी तत्काल 50 प्रतिशत टैरिफ लगाने जा रहे हैं। इससे भी ईरान नाराज हो गया है। यदि डोनाल्ड ट्रंप अपनी सनक में इसी तरह की बयानबाजी करते रहे तो इस सीजफायर का कोई औचित्य नहीं रह जाएगा।
दरअसल डोनाल्ड ट्रंप भले ही यह कह रहे हों कि सीजफायर करके उन्होंने एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है और उन्होंने इस जंग में ईरान को सबक सिखाकर ऐतिहासिक जीत दर्ज की है लेकिन सच्चाई तो यह है कि ईरान ने उन्हें सबक सिखाया है और अमेरिका को उसकी औकात दिखाई है। यह बात इसी से स्पष्ट होती है कि खुद अमेरिका में ही डोनाल्ड ट्रंप का भारी विरोध शुरू हो गया है। वहां की विपक्षी पार्टी ने डोनाल्ड ट्रंप के निवास वाइट हाउस के सामने जाकर जमकर विरोध प्रदर्शन किया है और डोनाल्ड ट्रंप ने इस्तीफा देने की मांग है और उनका कहना है कि इस तरह से डोनाल्ड टं्रप अपनी बातों से पलटते हैं और जंग में अपनी रणनीति बदलते हैं उससे पूरी दुनिया में अमेरिका का मजाक उड़ाया जा रहा है इससे लगता है कि डोनाल्ड ट्रंप का मानसिक संतुलन गड़बड़ा गया है इसलिए वे राष्ट्रपति पद के योग्य नहीं है।
उन्हें तत्काल राष्ट्रपति पद से इस्तीफा दे देना चाहिए। अमेरिका में यह भी सवाल उठ रहे हैं इस जंग से आखिर हासिल क्या हुआ है। यही वजह है कि अब डोनाल्ड ट्रंप और ज्यादा बौखला गये हैं और वे फिर से ईरान को धमकाने लगे हैं। यदि वे इसी तरह की हरकतें करेंगे तो जाहिर है कि बड़ी मुश्किल से सीजफायर के लिए राजी हुआ ईरान भी संघर्ष विराम को तोडऩे पर मजबूर हो जाएगा और यह संघर्ष विराम दो सप्ताह क्या एक सप्ताह भी नहीं चल पाएगा। यदि ऐसा हुआ तो एक बार फिर मिडिल ईस्ट जंग की आग में झुलसने लगेगा और इसका गंभीर दुष्परिणाम पूरी दुनिया को भुगतना पड़ेगा।



