प्रवेश के साथ ही मिलेंगी पुस्तकें व गणवेश सरकारी स्कूलों में नए सत्र की तैयारी तेज

ईश्वर चन्द्रा
कोरबा/नवप्रदेश। जिले में 16 जून से शुरू होने वाले नए शैक्षणिक सत्र की तैयारियां शिक्षा विभाग ने तेज कर दी हैं। इस बार स्कूल पहुंचने वाले विद्यार्थियों को प्रवेश के साथ ही नि:शुल्क पाठ्य पुस्तकें और गणवेश एक साथ उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जा रही है। बच्चों को अब शाला प्रवेशोत्सव की औपचारिक तिथि का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। पाठ्य पुस्तक निगम से संकुल केंद्रों में पुस्तकें और गणवेश पहुंचाने का काम शुरू हो चुका है। 10 जून तक सभी स्कूल प्रबंधनों को पुस्तकों का वितरण करने से पहले बार कोड स्कैन करना होगा।
शिक्षा मंडल से जुड़े सभी कक्षाओं के परीक्षा परिणाम जारी हो चुके हैं। विद्यार्थियों में नई किताबें और गणवेश मिलने को लेकर उत्साह है। प्राथमिक और मिडिल की पुस्तकें संकुल में दी जा रही हैं। वहीं हाई स्कूल की पुस्तकों को स्कूल पहुंचा कर दिया जाएगा।
संसाधन की उपलब्धता पर गौर किया जाए तो जिले के कई सरकारी स्कूल आज भी जर्जर भवन, शिक्षकों की कमी और बुनियादी सुविधाओं के अभाव जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं। नए शिक्षा सत्र में विद्यार्थियों को फिर से शिक्षकों की कमी, खेल सामग्री, प्रयोगशाला उपकरण और फर्नीचर जैसी मूलभूत सुविधाओं के अभाव का सामना करना पड़ेगा। विभाग द्वारा बच्चों को एक सेट गणवेश और सभी विषयों की पुस्तकें उपलब्ध कराने की तैयारी की जा रही है, लेकिन स्कूलों की आधारभूत स्थिति अब भी चिंता का विषय बनी हुई है।
ग्रीष्म अवकाश के दौरान बंद पड़े कई स्कूलों में धूल से भरे कमरे, टपकती छतें, टूटे दरवाजे और जलभराव जैसी समस्याएं साफ नजर आ रही हैं। शिक्षा विभाग की ओर से मिलने वाली जीर्णोद्धार राशि का उपयोग अधिकांश स्कूलों में प्रभावी ढंग से नहीं हो पाया है। मरम्मत कार्य को लेकर जिला शिक्षा विभाग और शाला प्रबंधन समितियों के बीच समन्वय की कमी भी सामने आ रही है। जिले में आज भी 234 स्कूल ऐसे हैं जो खपरैल और सीट की छत वाले भवनों में संचालित हो रहे हैं।
इसके अलावा कई पक्के भवनों वाले स्कूल भी घटिया निर्माण और समय पर मरम्मत नहीं होने के कारण जर्जर स्थिति में पहुंच चुके हैं। कुकरीचोली, कनकी, हरदीबाजार और मुड़ापार क्षेत्र के कई स्कूल वर्षों से खपरैल छत के सहारे चल रहे हैं। वहीं भाठापारा, छुरीकला, नूनेरा और नवापारा के स्कूलों की हालत भी बेहद खराब है। शहरी क्षेत्र के अंधरीकछार समेत दर्जनों स्कूलों में फर्श उखड़ चुके हैं और बरसात के दौरान कक्षाओं में पानी भरने की समस्या आम हो जाती है। जुलाई से सितंबर तक कई स्कूलों में टपकती छतों के कारण पढ़ाई प्रभावित होने की शिकायत लगातार सामने आती रही है।
एकल शिक्षक स्कूलों की समस्या
शिक्षकों की पदोन्नति और स्थानांतरण के बावजूद जिले के कई प्राथमिक स्कूल अब भी शिक्षक विहीन या एकल शिक्षक व्यवस्था के भरोसे चल रहे हैं। कटघोरा विकासखंड के झोरा और भांठापारा-छुरी जैसे स्कूल अटैच शिक्षकों के भरोसे संचालित हो रहे हैं।
120 स्कूलों में बिजली नहीं
स्कूल खुलने के दौरान हर गर्मी और वर्षा के चलते उमस की स्थिति रहती है। इस समस्या से निपटने के लिए शिक्षा विभाग की ओर से अभी तक पहल नहीं की गई है। तेज हवा के चलने और मौसमी बदलाव की वजह से 120 से भी अधिक स्कूलों में विद्युत आपूर्ति बाधित है। इसके अलावा 400 से अधिक स्कूल अस्थायी कनेक्शन के भरोसे संचालित हो रहे हैं।
आत्मानंद स्कूलों पर फोकस
पिछले दो वर्षों में जिले में 52 आत्मानंद स्कूल शुरू किए जा चुके हैं। निजी स्कूलों की तर्ज पर अंग्रेजी माध्यम शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए विभाग ने विशेष ध्यान आत्मानंद स्कूलों पर केंद्रित किया है। वहीं सामान्य सरकारी स्कूलों, विशेषकर खपरैल और सीट छत वाले स्कूलों की हालत लगातार खराब होती जा रही है।



