छत्तीसगढ़

Coal Scam : कोयला घोटाले में बड़ा झटका, ड्राइवर को लेकर अदालत की सख्त टिप्पणी

बिलासपुर में रविवार को कोयला घोटाले से जुड़े मामले में अदालत के फैसले के बाद राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में चर्चा तेज (Coal Scam) हो गई। हाई कोर्ट के बाहर सुबह से ही मामले पर नजर रखी जा रही थी। जैसे ही नारायण साहू की जमानत याचिका खारिज होने की खबर सामने आई, लोगों के बीच पूरे मामले को लेकर फिर बहस शुरू हो गई। जांच एजेंसियों की कार्रवाई और अदालत की सख्त टिप्पणी ने मामले को फिर सुर्खियों में ला दिया।

अदालत के फैसले के बाद वकीलों और पक्षकारों के बीच लंबे समय तक चर्चा होती रही। कोर्ट ने सुनवाई के दौरान साफ कहा कि नारायण साहू को केवल ड्राइवर मानना सही नहीं होगा। अदालत की टिप्पणी के बाद अब पूरे कथित वसूली नेटवर्क को लेकर नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं।

जमानत याचिका हुई खारिज : Coal Scam

कोयला घोटाले के कथित मास्टरमाइंड सूर्यकांत तिवारी के ड्राइवर नारायण साहू की जमानत याचिका हाई कोर्ट ने खारिज कर दी। सुनवाई के बाद अदालत ने कहा कि आरोपी केवल वाहन चालक की भूमिका में नहीं था, बल्कि कथित वसूली नेटवर्क का सक्रिय सदस्य था।

कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी माना कि जांच एजेंसियों के पास आरोपी के खिलाफ पर्याप्त और गंभीर सबूत मौजूद हैं। अदालत के अनुसार, मामले में उसकी भूमिका अहम दिखाई दे रही है।

दो साल से थी तलाश

जांच एजेंसी ईओडब्ल्यू नारायण साहू की पिछले करीब दो साल से तलाश कर (Coal Scam) रही थी। करीब दो महीने पहले उसे गिरफ्तार किया गया था। जांच में सामने आया कि कोयला लेवी से जुड़े पैसों के कलेक्शन और ट्रांसफर का काम कथित तौर पर उसी के जरिए कराया जाता था। गिरफ्तारी के बाद आरोपी को जेल भेज दिया गया था। इसके बाद उसने विशेष अदालत में जमानत के लिए अर्जी लगाई थी, लेकिन वहां से राहत नहीं मिलने पर हाई कोर्ट का रुख किया गया।

अदालत में क्या दलील दी गई

जमानत याचिका में नारायण साहू की ओर से कहा गया कि उसके खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं मिला है। उसने खुद को केवल कारोबारी का ड्राइवर बताया और घोटाले में शामिल होने से इनकार किया। याचिका में यह भी कहा गया कि पहले उस पर बयान देने का दबाव बनाया गया और बाद में उसे मामले में आरोपी बना दिया गया। दूसरी तरफ राज्य सरकार की ओर से जमानत का कड़ा विरोध किया गया।

करोड़ों की वसूली का आरोप

राज्य शासन के अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि जांच में करोड़ों रुपए की कथित अवैध वसूली के लेनदेन से जुड़े दस्तावेज सामने आए हैं। एजेंसियों के मुताबिक आरोपी करीब 13 करोड़ रुपए की नकद वसूली में शामिल था। सरकार की ओर से यह भी कहा गया कि आरोपी लंबे समय तक फरार रहा और पूछताछ से बचने की कोशिश करता रहा। मामले में उसके खिलाफ गैर जमानती वारंट भी जारी किया गया था।

डायरी में मिलीं कई एंट्रियां

हाई कोर्ट ने सुनवाई के दौरान यह भी माना कि जांच के दौरान जब्त की गई हस्तलिखित डायरी में नारायण साहू के नाम से कई एंट्रियां (Coal Scam) मिली हैं। अदालत ने कहा कि आरोपी सूर्यकांत तिवारी का भरोसेमंद व्यक्ति था और कथित वसूली तंत्र में उसकी अहम भूमिका दिखाई देती है। कोर्ट की इस टिप्पणी के बाद अब मामले में आगे की जांच और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।

क्या है पूरा मामला

जांच एजेंसियों का दावा है कि छत्तीसगढ़ में कोयला परिवहन और परमिट प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों के जरिए करोड़ों रुपए की अवैध वसूली की गई। आरोप है कि ऑनलाइन परमिट व्यवस्था को ऑफलाइन कर वसूली का नेटवर्क चलाया गया। इस मामले में दो पूर्व मंत्रियों, कई अधिकारियों, विधायकों और कारोबारियों समेत 36 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। जांच एजेंसियां फिलहाल पूरे नेटवर्क की भूमिका की जांच कर रही हैं।

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