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GST Collection : अचानक इतना पैसा कैसे आया, अप्रैल में टैक्स कलेक्शन ने क्या नया संकेत दिया

दिल्ली में आर्थिक हलकों में सुबह से ही एक अलग तरह की चर्चा सुनाई (GST Collection) दे रही थी। आंकड़े सामने आते ही लोगों के बीच उत्साह और हैरानी दोनों दिखे। कई लोग इसे अर्थव्यवस्था की मजबूती बता रहे थे, तो कुछ इस उछाल के पीछे की असली वजह जानने में लगे थे। सरकारी दफ्तरों से लेकर बाजार तक, हर जगह इसी पर बातचीत चलती रही।

वहीं व्यापारियों और आम लोगों के बीच भी यह सवाल तेजी से उठता दिखा कि आखिर अचानक इतनी बड़ी रकम कैसे जुट गई। कुछ लोग इसे कारोबार में सुधार से जोड़ रहे थे तो कुछ का मानना था कि इसके पीछे बाहरी कारण भी उतने ही अहम हैं। माहौल ऐसा था कि हर कोई इन आंकड़ों को अपने तरीके से समझने की कोशिश कर रहा था।

रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा टैक्स कलेक्शन (GST Collection)

इसी बीच जारी आंकड़ों ने साफ कर दिया कि अप्रैल में सरकार के पास टैक्स के रूप में अब तक की सबसे बड़ी राशि आई है। यह रकम ₹2.43 लाख करोड़ तक पहुंच गई, जो पहले कभी नहीं देखी गई थी। मार्च के मुकाबले इसमें साफ बढ़ोतरी दर्ज हुई और पिछले साल के आंकड़े को भी पीछे छोड़ दिया।

सालाना तुलना करें तो पिछले साल के मुकाबले इसमें करीब 8.7 प्रतिशत की बढ़त देखी गई। वहीं शुद्ध राजस्व भी बढ़कर ₹2.11 लाख करोड़ तक पहुंच गया, जो पिछले साल की तुलना में ज्यादा है।

इंपोर्ट बना सबसे बड़ा कारण (GST Collection)

इस बार सबसे खास बात यह रही कि कुल बढ़त में आयात का बड़ा योगदान सामने आया। इंपोर्ट से मिलने वाले टैक्स में करीब 25 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़ोतरी दर्ज की गई और यह आंकड़ा ₹57 हजार करोड़ से ऊपर चला गया।

इसके मुकाबले घरेलू कारोबार से आने वाला राजस्व बढ़ा जरूर, लेकिन उसकी रफ्तार काफी धीमी रही। इससे यह संकेत मिला कि कुल उछाल में बाहरी कारकों की भूमिका ज्यादा रही है।

वैश्विक हालात का भी असर

दुनिया के कुछ हिस्सों में चल रहे तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का असर भी इन आंकड़ों में दिखाई दिया। अप्रैल के दौरान तेल की कीमतें काफी ऊपर चली गई थीं, जिससे आयात महंगा हुआ और टैक्स की रकम भी बढ़ी। इसका सीधा असर यह हुआ कि कुल कलेक्शन में तेजी देखने को मिली, हालांकि यह पूरी तरह घरेलू मजबूती की वजह से नहीं था।

रिफंड के आंकड़े भी बढ़े

अप्रैल में रिफंड के मामले में भी बढ़ोतरी दर्ज (GST Collection) की गई। कुल रिफंड बढ़कर ₹31 हजार करोड़ से ज्यादा हो गया। खास बात यह रही कि घरेलू रिफंड में तेज उछाल देखने को मिला, जबकि निर्यात से जुड़े रिफंड में कुछ कमी दर्ज की गई।

आगे क्या संकेत मिल रहे हैं

हालांकि कुल कलेक्शन रिकॉर्ड स्तर पर है, लेकिन इसकी वृद्धि दर में हल्की गिरावट नजर आई। मार्च में जो रफ्तार थी, वह अप्रैल में थोड़ा धीमी हुई है। इससे संकेत मिल रहा है कि घरेलू खपत में कुछ नरमी आ सकती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर वैश्विक हालात स्थिर रहते हैं और देश के अंदर मांग बनी रहती है, तो आने वाले समय में भी ऐसे आंकड़े देखने को मिल सकते हैं, लेकिन इसके लिए संतुलन बनाए रखना जरूरी होगा।

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