छत्तीसगढ़

Vedanta Power Plant Accident: 25 मौतों के बाद हलचल, राज्यपाल ने बुलाया अफसर, सख्त निर्देश जारी

सक्ती हादसे के बाद माहौल अब भी भारी है। कई परिवारों के घरों में सन्नाटा पसरा है, तो वहीं प्लांट के आसपास काम करने वाले मजदूरों में डर साफ दिख रहा है। Vedanta Power Plant Accident को लेकर लोगों में गुस्सा भी है और सवाल भी कि आखिर इतनी बड़ी लापरवाही कैसे हो गई।

गांव के लोगों का कहना है कि हादसे के बाद अधिकारी जरूर पहुंचे, लेकिन अब असली जरूरत जवाबदेही तय करने की है। कई मजदूरों ने बताया कि पहले भी सुरक्षा को लेकर चिंता जताई गई थी, मगर उस पर गंभीरता नहीं दिखी। अब इस घटना ने पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

Vedanta Power Plant Accident के बाद अफसर तलब

रायपुर में Ramen Deka ने इस गंभीर हादसे को लेकर तुरंत संज्ञान लिया। उन्होंने लेबर विभाग के जिम्मेदार अफसर और चीफ इंस्पेक्टर ऑफ फैक्ट्रीज आईएएस Himshikhar Gupta को लोकभवन बुलाकर पूरी स्थिति की जानकारी ली।

सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता

राज्यपाल ने साफ निर्देश दिए कि औद्योगिक इकाइयों में होने वाली दुर्घटनाओं को रोकना सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी भी तरह की लापरवाही को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करनी होगी।

क्या क्या दिए गए निर्देश

उन्होंने कहा कि कारखानों में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम (Vedanta Power Plant Accident) किए जाएं। मशीनों की नियमित जांच हो, सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन किया जाए और कर्मचारियों को समय समय पर ट्रेनिंग दी जाए। साथ ही सुरक्षा व्यवस्था की लगातार निगरानी करने पर भी जोर दिया गया, ताकि हादसों को पहले ही रोका जा सके।

तीन साल में सैकड़ों मौतें

प्रदेश में औद्योगिक सुरक्षा की स्थिति पर नजर डालें तो तस्वीर चिंताजनक दिखती है। पिछले तीन सालों में करीब सवा तीन सौ मजदूरों की मौत हो चुकी है, लेकिन सुरक्षा देखने वाले विभाग की ओर से किसी जिम्मेदार पर ठोस कार्रवाई नजर नहीं आई।

विधानसभा में सामने आए आंकड़े

विधानसभा के बजट सत्र में श्रम विभाग ने जानकारी (Vedanta Power Plant Accident) दी थी कि तीन साल में 296 मजदूरों की जान गई। इसके बाद अब सक्ती के इस हादसे में 25 और मौतें जुड़ गईं। इस तरह कुल आंकड़ा 321 तक पहुंच गया है, जो चिंता बढ़ाने वाला है।

कंपनी और जिम्मेदारी का सवाल

इस मामले में वेदांता कंपनी से जुड़े लोगों पर भी केस दर्ज किया गया है। Anil Agarwal समेत करीब 10 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई है, लेकिन कानूनी जानकार इसे ज्यादा असरदार नहीं मान रहे हैं।

अफसरों पर कार्रवाई नहीं

इतने बड़े आंकड़े के बावजूद औद्योगिक स्वास्थ्य और सुरक्षा विभाग के किसी अधिकारी पर सख्त कार्रवाई नहीं हुई। यहां तक कि नोटिस तक जारी नहीं किए गए, जिससे विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।

विभाग की जिम्मेदारी क्या

राज्य में औद्योगिक स्वास्थ्य और सुरक्षा संचालनालय की जिम्मेदारी होती है कि वह समय समय पर फैक्ट्रियों का निरीक्षण करे और खामियों की रिपोर्ट दे। जरूरत पड़ने पर यह विभाग किसी भी फैक्ट्री को बंद कराने का अधिकार भी रखता है, लेकिन जमीनी स्तर पर इसका असर नजर नहीं आ रहा।

पुराने हादसे भी याद

प्रदेश में इससे पहले भी कई बड़े हादसे (Vedanta Power Plant Accident) हो चुके हैं। 2009 में कोरबा के बालको प्लांट में चिमनी गिरने से 40 मजदूरों की मौत हुई थी। उस समय भी कार्रवाई हुई, लेकिन बाद में मामला ठंडा पड़ गया।

घायल मजदूरों की संख्या भी बड़ी

सिर्फ मौतें ही नहीं, बल्कि पिछले कुछ सालों में 248 से ज्यादा मजदूर घायल भी हुए हैं। इससे साफ है कि फैक्ट्री सुरक्षा को लेकर हालात लगातार गंभीर बने हुए हैं।

हजारों कारखाने, बढ़ता खतरा

छत्तीसगढ़ में 7 हजार से ज्यादा कारखाने संचालित हैं, जिनमें से कई खतरनाक श्रेणी में आते हैं। ऐसे में सुरक्षा मानकों का पालन बेहद जरूरी हो जाता है, लेकिन लगातार हादसे यह बता रहे हैं कि जमीन पर हालात अलग हैं।

हाल के बड़े हादसे

हाल के समय में भी कई दुर्घटनाएं सामने आई हैं। बलौदाबाजार में विस्फोट, रायपुर के सिलतरा में छत गिरने की घटना, सरगुजा और बेमेतरा के हादसे, रायगढ़ में फैक्ट्री विस्फोट और भिलाई में अलग अलग घटनाएं यह दिखाती हैं कि औद्योगिक सुरक्षा अभी भी बड़ा मुद्दा बना हुआ है।

Related Articles

Back to top button