छत्तीसगढ़

Balodabazar Water Scheme: 450 तालाब भर गए, गांवों में निस्तारी संकट से बड़ी राहत

बलौदाबाजार जिले में इस बार गर्मी के बीच Balodabazar Water Scheme ने ग्रामीण इलाकों में बड़ी राहत दी है। जिन गांवों में हर साल पानी की किल्लत से लोग परेशान रहते थे, वहां अब तालाबों में पानी भरने से हालात बदलते दिख रहे हैं। गांवों के लोग खुद मान रहे हैं कि इस पहल से रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना आसान हो गया है और निस्तारी की दिक्कत काफी हद तक कम हुई है।

स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि पहले जहां गर्मी में तालाब सूख जाते थे, वहीं अब पानी उपलब्ध होने से पशु-पक्षियों और खेती से जुड़े कामों में भी सहूलियत मिल रही है। Balodabazar Water Scheme के चलते आसपास के इलाकों में भी पानी का स्तर सुधरने की उम्मीद जताई जा रही है।

450 तालाबों में पहुंचा पानी (Balodabazar Water Scheme)

ग्रीष्म ऋतु में पानी की कमी को देखते हुए जिला प्रशासन ने महानदी जलाशय परियोजना की नहर के जरिए तालाबों को भरने का काम शुरू किया है। अब तक जिले के 450 तालाबों में पानी भरा जा चुका है, जबकि 128 तालाबों में पानी भरने का काम अभी जारी है। जल संसाधन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार इस पूरी योजना के तहत जिले के 384 गांवों के कुल 683 तालाबों को भरने का लक्ष्य रखा गया है।

Balodabazar Water Scheme से मिलेगा पूरा फायदा

बताया गया है कि जिन तालाबों में अभी पानी नहीं भरा गया है, वहां भी जल्द काम पूरा (Balodabazar Water Scheme) कर लिया जाएगा। सभी तालाब भर जाने के बाद ग्रामीणों को गर्मी के दौरान निस्तारी की समस्या से काफी राहत मिलेगी। इसके साथ ही तालाबों में पानी भरने से आसपास के क्षेत्रों में वाटर रिचार्ज भी होगा, जिससे भूजल स्तर में सुधार आने की संभावना है।

कलेक्टर ने किया निरीक्षण (Balodabazar Water Scheme)

Kuldeep Sharma ने पिछले सप्ताह बलौदाबाजार विकासखंड के कई गांवों का दौरा कर तालाबों और नहरों की स्थिति का जायजा लिया था। निरीक्षण के दौरान उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि नहर का पानी बेकार बहने न पाए और इसकी लगातार निगरानी की जाए।

मॉनिटरिंग पर जोर

अधिकारियों को यह भी कहा गया है कि काम में किसी तरह की लापरवाही न हो और समय पर सभी तालाबों को भरने का लक्ष्य पूरा किया जाए। Balodabazar Water Scheme के जरिए प्रशासन यह सुनिश्चित करना चाहता है कि गर्मी के मौसम में गांवों को पानी के संकट का सामना न करना पड़े।

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