छत्तीसगढ़

Census Duty Case: हाईकोर्ट ने साफ कहा जनगणना ड्यूटी वैध, कर्मचारियों को करना होगा पालन

छत्तीसगढ़ में शुरू होने जा रहे जनगणना कार्य को लेकर कर्मचारियों के बीच जो असमंजस था, उस पर अब census duty case में हाईकोर्ट का फैसला (Census Duty Case) सामने आ गया है। इस फैसले के बाद कई कर्मचारियों की चिंता खत्म हुई है, वहीं कुछ के लिए यह साफ संदेश भी है कि इस काम से बचना आसान नहीं होगा।

इस census duty case को लेकर सरकारी दफ्तरों में भी चर्चा तेज है। खासकर उन कर्मचारियों के बीच जिनकी ड्यूटी जनगणना में लगाई गई है। कोर्ट के फैसले के बाद अब प्रशासन को भी साफ रास्ता मिल गया है कि वह इस राष्ट्रीय कार्य को बिना किसी बाधा के आगे बढ़ा सके।

याचिका पर कोर्ट का फैसला (Census Duty Case)

छत्तीसगढ़ में एक मई से जनगणना शुरू होने जा रही है। इसी बीच जनपद पंचायत के एक कर्मचारी ने अपनी ड्यूटी को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका लगाई थी, जिसे जस्टिस पीपी साहू की एकल पीठ ने खारिज कर दिया।

जनगणना को बताया राष्ट्रीय कार्य

कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि जनगणना एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय काम है। इसके लिए स्थानीय निकायों के कर्मचारियों की सेवाएं लेना पूरी तरह सही और वैध है।

कानून का हवाला

हाईकोर्ट ने कहा कि जनगणना अधिनियम 1948 के तहत प्रशासन को यह अधिकार है कि वह पंचायत और अन्य निकायों के कर्मचारियों को इस कार्य के लिए ड्यूटी पर लगा सकता है।

क्या था मामला (Census Duty Case)

बेमेतरा जिले के नवागढ़ जनपद पंचायत में पदस्थ सहायक ग्रेड 3 मनीष जैन ने याचिका दायर की थी। उन्होंने कलेक्टर द्वारा 9 अप्रैल 2026 को जारी आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उन्हें जनगणना शाखा में अटैच किया गया था। याचिकाकर्ता का कहना था कि यह आदेश दुर्भावनापूर्ण है और उन्हें जानबूझकर परेशान करने के लिए उनकी मूल पोस्टिंग से हटाया गया है।

राज्य सरकार का पक्ष

राज्य सरकार की ओर से पेश अधिवक्ता ने कहा कि यह सामान्य ट्रांसफर या अटैचमेंट नहीं है, बल्कि जनगणना अधिनियम के तहत दी गई विशेष ड्यूटी है। उन्होंने बताया कि 1 मई से 30 मई 2026 तक जनगणना का पहला चरण चलेगा और इसके लिए कर्मचारियों की ड्यूटी लगाना जरूरी है।

कोर्ट की साफ टिप्पणी

कोर्ट ने कहा कि धारा 7 के तहत जिला प्रशासन को यह अधिकार है कि वह किसी भी स्थानीय निकाय के कर्मचारी को इस कार्य में लगा (Census Duty Case) सकता है। साथ ही यह भी कहा गया कि जिसे यह आदेश दिया जाता है, वह उसे मानने के लिए बाध्य होता है और इस दौरान वह लोक सेवक की श्रेणी में आता है।

आगे क्या विकल्प

हाईकोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए कर्मचारी को यह छूट दी है कि वह विभाग के सामने अपना पक्ष रख सकता है।

बिलासपुर में ट्रेनिंग शुरू

इधर बिलासपुर में जनगणना को लेकर तैयारी तेज हो गई है। यहां 476 शिक्षकों की ड्यूटी प्रगणक और पर्यवेक्षक के रूप में लगाई गई है। इनका प्रशिक्षण 27 से 29 अप्रैल तक अलग अलग स्कूलों में चल रहा है, जहां सुबह से शाम तक ट्रेनिंग दी जा रही है।

गैरहाजिरी पर सख्ती

पहले प्रशिक्षण में अनुपस्थित रहने वाले 42 कर्मचारियों को नोटिस दिया जा चुका है। अब निर्देश है कि अगर कोई कर्मचारी गैरहाजिर रहता है या उसे कार्यमुक्त नहीं किया जाता तो दोनों पर कार्रवाई होगी।

पूरे राज्य में अभियान

1 मई से 30 मई तक जनगणना का पहला चरण (Census Duty Case) चलेगा। इस दौरान करीब 62,500 कर्मचारी घर घर जाकर जानकारी जुटाएंगे। इसके साथ ही 30 अप्रैल तक नागरिकों को डिजिटल पोर्टल पर खुद भी अपनी गणना करने का विकल्प दिया गया है। अभियान के दौरान बिना अनुमति छुट्टी लेना भी प्रतिबंधित रहेगा।

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