संपादकीय

संपादकीय: सच होता ग्राम सुराज का सपना

Editorial: भारवर्ष में वैदिक काल से ही ग्राम स्वराज की अवधारणा की नींव पड़ चुकी थी। प्राचीन काल में गांव ही शासन तंत्र की धूरी हुआ करते थे। आजादी के बाद राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने ग्र्राम सुराज का सपना देखा था और उनका कथन है कि भारत की आत्मा गांवों में बस्ती है। जब तक गांवों का विकास नहीं होगा तब तक देश का विकास नहीं हो सकता। राष्ट्रपिता के ग्राम स्वराज के स्वप्र को साकार करने के लिए स्वंतंत्रता के बाद ही ग्राम विकास पर केद्रिन्त योजनाएं बनने लगी और ग्राम पंचायतों को ज्यादा से ज्यादा अधिकार दिये जाने लगे।

जिससे गांवों के विकास का मार्ग प्रशस्त हुआ। इस काम में तेजी उस समय आई जब 73वें संविधान संसोधन अधिनियम 1992 के तहत 24 अपैल 1992 को स्थानीय ग्रामीण स्वशासन के लिए त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था लागू की गई। इसका मुख्य उद्देश्य ग्राम स्तर पर सत्ता का विकेन्द्रीयकरण करना रहा है। त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था लागू होने के बाद से गांवों का विकास तेजी से होने लगा है और अब हमारे गांव की समस्याओं के मकडज़ाल से बाहर निकलने लगे हैं।

ग्राम पंचायतों को हर साल कम से कम एक करोड़ रूपये की राशि विभिन्न विकास कार्यों के लिए प्रदान की जाती है जिससे वे गांवों में साफ सफाई, पेयजल आर्पूति, निस्तार की समस्या आदि का समाधान करती हैं। इसके अलावा शिक्षा और प्रधानमंत्री आवास जैसी सरकारी योजनाओं का भी क्रियान्वयन करती है। सत्ता का ग्राम पंचायत स्तर पर विकेन्द्रीयकरण होने से अब गांवों की दिशा और ग्रामीणों की दशा में तेजी से बदलाव आ रहा है।

फल्स्वरूप धीरे धीरे ही सही लेकिन अब ग्राम स्वराज का सपना साकार होने लगा है। इसके लिए राज्य सरकारें भी समय समय पर विभिन्न अभियान चलाती हैं। छत्तीसगढ़ की ही बात करें तो तात्कालीन मुख्यमंत्री डॉ.रमन सिंह की सरकार हर साल गर्मी के मौसम में ग्राम सुराज अभियान चलाती थी। इस दौरान पूरा प्रशासन तंत्र गांव गांव में पहुंचता था और ग्रामीणों की समस्याओं का मौके पर ही समाधान करता था। पूर्व मुख्यमंत्री डॉ.रमन सिंह खुद चिलचिलाती धूप में गांव पहुंचकर पेड़ के नीचे ग्रामीणों की बैठक लेते थे।

गांव की समस्या सुनते थे और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन की जानकारी लेते थे। इस तरह के अभियान से भी ग्रामों के विकास की राह आसाम हुई है। अब पंचायती राज व्यवस्था में महिलाएं भी अपनी सक्रिय भागीदारी निभा रही हैं क्योंकि तात्कालीन प्रधानमंत्री स्वर्गीय राजीव गांधी ने त्रिस्तरीय पंचायत व्यवस्था लागू करवाने के साथ ही पंचायतों में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान भी लागू कराया था। तब से महिलाएं भी अपने गांव के विकास में अपना योगदान दे रही हैं और ग्राम सुराज के सपने को साकार करने में अग्रणी भूमिका निभा रही हैं। अब पंचायती राज व्यवस्था को और अधिक मजबूती देने के लिए सरकार को चाहिए की वह पंचायतों को और ज्यादा संसाधन मुहैया कराये।

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