छत्तीसगढ़

Amit Jogi Supreme Court Relief : छत्तीसगढ़ की राजनीति में जोगी का ‘कमबैक’, 29 अप्रैल को अमित जोगी का नया अवतार, जग्गी केस में राहत के बाद बढ़ी हलचल

छत्तीसगढ़ की राजनीति के सबसे चर्चित और विवादित ‘जग्गी हत्याकांड’ मामले में एक नया और भावनात्मक मोड़ (Amit Jogi Supreme Court Relief) आ गया है। जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) के प्रदेश अध्यक्ष अमित जोगी ने सुप्रीम कोर्ट से मिली बड़ी राहत के बाद ऐलान किया है कि आगामी 29 अप्रैल उनके जीवन के लिए ‘नया जन्म’ साबित होगा।

कोर्ट ने फिलहाल अमित जोगी के सरेंडर पर रोक लगा दी है, जिससे उनके जेल जाने का खतरा टल गया है। इस फैसले के बाद अमित जोगी पूरी तरह से ‘एक्शन मोड’ में नजर आ रहे हैं और उन्होंने सोशल मीडिया पर एक भावुक पोस्ट साझा कर अपने इरादे साफ कर दिए हैं।

पापा की समाधि से शुरू होगी नई सियासी पारी (Amit Jogi Supreme Court Relief)

अमित जोगी ने अपने पिता और प्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री स्वर्गीय अजीत जोगी को याद करते हुए लिखा कि आगामी 29 अप्रैल को वे गौरेला स्थित ‘जोगी स्थल’ जाएंगे। खास बात यह है कि इसी दिन अजीत जोगी की 80वीं जयंती भी है। अमित जोगी इसे केवल एक संयोग नहीं, बल्कि ईश्वर का आशीर्वाद मान रहे हैं।

उन्होंने साफ किया है कि वे अपने पिता की समाधि पर नतमस्तक होकर एक बार फिर छत्तीसगढ़ की जनता की सेवा के लिए खुद को समर्पित करेंगे। सियासी गलियारों में इसे जोगी परिवार की राजनीति के ‘कमबैक’ के तौर पर देखा जा रहा है।

हाईकोर्ट का फैसला और सुप्रीम कोर्ट की राहत

इस पूरे मामले की जड़ें 2003 के चर्चित रामावतार जग्गी हत्याकांड (Amit Jogi Supreme Court Relief) से जुड़ी हैं। साल 2007 में निचली अदालत ने अमित जोगी को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया था, लेकिन हाईकोर्ट ने हाल ही में उस फैसले को पलटते हुए उन्हें दोषी करार दिया और तीन हफ्ते के भीतर सरेंडर करने का आदेश दिया था।

अमित जोगी ने इस आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया, जहाँ से उन्हें सीबीआई का जवाब आने तक बड़ी राहत मिल गई है। फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है, जिसने जोगी समर्थकों में नया उत्साह भर दिया है।

11 हजार पन्नों की चार्जशीट और 23 साल पुरानी जंग

2003 में हुई एनसीपी नेता रामावतार जग्गी की हत्या के मामले ने छत्तीसगढ़ की पूरी सियासत को हिलाकर रख दिया था। 2004 में सीबीआई ने इस केस की कमान संभाली और करीब 11 हजार पन्नों की चार्जशीट दाखिल की थी। इस लंबे कानूनी संघर्ष में अमित जोगी उतार-चढ़ाव देखते रहे हैं।

अब जबकि सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें सरेंडर से छूट (Amit Jogi Supreme Court Relief) दी है, अमित जोगी इसे अपने राजनीतिक जीवन की नई शुरुआत मान रहे हैं। जोगी का कहना है कि 29 अप्रैल से वे एक नई ऊर्जा के साथ जनता के बीच होंगे, जिसे वे अपना ‘दूसरा जन्म’ कह रहे हैं।

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