NHAI Aarogya Van Chhattisgarh : छत्तीसगढ़ के नेशनल हाईवे अब बनेंगे ‘आरोग्य वन’, सड़कों के किनारे महकेंगे औषधीय पौधे

छत्तीसगढ़ की सड़कों पर अब सिर्फ गाड़ियां नहीं (NHAI Aarogya Van Chhattisgarh) दौड़ेंगी, बल्कि हाईवे के किनारे आपको मिनी जंगलों जैसा अहसास भी होगा। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने रायपुर-बिलासपुर हाईवे सहित प्रदेश के तमाम प्रमुख नेशनल हाईवे के किनारे ‘आरोग्य वन’ विकसित करने की एक महत्वाकांक्षी योजना तैयार की है।
इस खास प्रोजेक्ट के तहत छत्तीसगढ़ के उन बड़े भूखंडों को चिन्हित किया गया है जो अब तक खाली पड़े थे। आगामी मानसून सीजन में इन जमीनों पर सघन पौधारोपण किया जाएगा। NHAI का यह कदम न केवल पर्यावरण के लिए संजीवनी साबित होगा, बल्कि हाईवे के किनारे खाली पड़ी जमीन को अतिक्रमण से बचाने और प्राकृतिक सुंदरता बढ़ाने में भी मदद करेगा।
36 प्रजातियों के 67 हजार से ज्यादा पौधे, नीम, आंवला और जामुन से संवरेगा ग्रीन कॉरिडोर (NHAI Aarogya Van Chhattisgarh)
NHAI ने इस अभियान के लिए पौधों की ऐसी 36 प्रजातियों को चुना है जो न केवल औषधीय गुणों से भरपूर हैं, बल्कि पक्षियों के लिए भी बेहतरीन ठिकाना साबित होंगी। इस लिस्ट में नीम, आंवला, इमली, जामुन, नींबू, गूलर और मौलसरी जैसे पारंपरिक और स्वदेशी पेड़ों को प्राथमिकता दी गई है।
पहले चरण में छत्तीसगढ़ समेत देश के 11 राज्यों को शामिल किया गया है, जहां कुल 67,462 औषधीय पौधे लगाए जाने का लक्ष्य है। छत्तीसगढ़ की जलवायु और उपलब्ध जमीन के हिसाब से पौधों का चयन किया गया है, ताकि वे तेजी से विकसित हो सकें। इस पहल का मुख्य उद्देश्य आयुर्वेद की पुरानी पद्धति को बढ़ावा देना और स्वदेशी वनस्पतियों को संरक्षित करना है।
टोल प्लाजा और जंक्शनों पर दिखेगी हरियाली, 188 हेक्टेयर में फैलेगा ‘नेचर’ का पहरा (NHAI Aarogya Van Chhattisgarh)
प्राधिकरण ने पौधरोपण के लिए उन जगहों को प्राथमिकता दी है जहां खाली जमीन का बड़ा हिस्सा उपलब्ध है। इनमें प्रमुख रूप से टोल प्लाजा के आसपास का इलाका, रोड के किनारे बने वाहन चालकों के विश्राम स्थल, इंटरचेंजों और क्लोवरलीफ जंक्शनों को शामिल किया गया है।
कुल मिलाकर 188 हेक्टेयर भूखंड पर यह हरित नेटवर्क तैयार किया जाएगा। प्राधिकरण ने केवल पौधे लगाने का ही नहीं, बल्कि उन्हें जीवित रखने और उनकी देखरेख करने का भी विस्तृत प्लान बनाया है। इन ‘आरोग्य वनों’ के विकसित होने से देश में एक समृद्ध हरित गलियारा (Green Corridor) बनेगा, जो प्रदूषण कम करने के साथ-साथ सड़क किनारे की विरासत को भी सहेजने का काम करेगा।



