छत्तीसगढ़

Chhattisgarh Opium Controversy : छत्तीसगढ़ विधानसभा में अफीम की खेती पर जोरदार हंगामा

छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र के दौरान शून्यकाल में अफीम की अवैध खेती का मुद्दा (Chhattisgarh Opium Controversy) गरमाया रहा। राजधानी रायपुर से महज 50 किलोमीटर की दूरी पर छत्तीसगढ़ अफीम विवाद का यह सनसनीखेज मामला सामने आने के बाद सदन में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। विपक्ष ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि प्रदेश की पहचान बदलने की कोशिश की जा रही है।

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विपक्ष के वरिष्ठ सदस्य भूपेश बघेल ने सरकार को घेरते हुए कहा कि विनायक ताम्रकार नामक व्यक्ति अपनी निजी भूमि पर धड़ल्ले से अफीम की खेती कर रहा है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “पूरा छत्तीसगढ़ आज सुल्फे और नशे से बर्बाद हो रहा है।

एक तरफ किसानों के धान की खरीदी में बाधाएं आ रही हैं, तो दूसरी तरफ छत्तीसगढ़ अफीम विवाद को संरक्षण दिया जा रहा है। ऐसा प्रतीत होता है कि शासन की मंशा छत्तीसगढ़ को ‘धान का कटोरा’ से बदलकर ‘अफीम का कटोरा’ बनाने की है।” उन्होंने आरोप लगाया कि यह पूरा खेल सामूहिक संरक्षण में खेला जा रहा है।

वहीं, इस चर्चा के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी जांच प्रक्रिया (Chhattisgarh Opium Controversy) पर सवाल उठाए। उन्होंने घटना का विवरण देते हुए बताया कि होली से ठीक पहले जब ग्रामीण लकड़ी इकट्ठा करने गए थे, तब चने के खेत के बीच छिपाई गई इस अफीम की खेती का पता चला।

बघेल ने तल्ख लहजे में कहा कि छत्तीसगढ़ अफीम विवाद की एफआईआर (FIR) को जानबूझकर कमजोर बनाया गया है। कलेक्टर की रिपोर्ट में विनायक ताम्रकार के खेत की पुष्टि हुई है, लेकिन पुलिस ने मुख्य आरोपी के बजाय नौकर को सामने कर दिया। मुख्य आरोपी का नाम सूची में तीसरे स्थान पर डालना इस बात का प्रमाण है कि मामले में भारी ‘लीपापोती’ की जा रही है।

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सदन में अजय चंद्राकर ने पलटवार करते हुए कहा कि यह अवैध खेती कोई नई बात नहीं है, बल्कि पिछले 4 वर्षों से जारी है। उन्होंने इसके पीछे पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के संरक्षण का अंदेशा (Chhattisgarh Opium Controversy) जताया। सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच इस छत्तीसगढ़ अफीम विवाद को लेकर हुए हंगामे ने सदन की कार्यवाही को काफी देर तक प्रभावित किया।

विपक्ष ने मांग की है कि इस संवेदनशील मुद्दे पर सामान्य चर्चा के बजाय गहन जांच हो, क्योंकि अब पंजाब की तरह छत्तीसगढ़ में भी नशे का कारोबार केवल परिवहन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यहाँ नशे की फसल लहलहाने लगी है। छत्तीसगढ़ अफीम विवाद ने अब प्रदेश की राजनीति में एक नया मोड़ ले लिया है।

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