Khamenei Palace Strike : ‘खामेनेई के महल पर जुटे थे शीर्ष सैन्य अधिकारी’ – मोसाद को कैसे मिली भनक?

Khamenei Palace Strike

Khamenei Palace Strike

ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनेई की मौत के बाद पश्चिम एशिया में भूचाल आया (Khamenei Palace Strike) हुआ है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, जिस समय तेहरान स्थित उनके परिसर में वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों की हाई-लेवल बैठक चल रही थी, उसी दौरान इज़रायल ने सटीक हमला किया। इस पूरे घटनाक्रम में इज़रायल की खुफिया एजेंसी मोसाद की भूमिका को लेकर चर्चा तेज हो गई है। हालांकि, कई दावों की स्वतंत्र पुष्टि अब भी बाकी है।

क्या चल रही थी गुप्त बैठक?

मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया कि हमले के समय इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के शीर्ष कमांडर और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े अधिकारी मौजूद थे। दावा है कि परिसर पर एक साथ कई बंकर-बस्टर बम गिराए गए। कुछ सेकेंड में सुरक्षा कवच माने जाने वाला परिसर मलबे में तब्दील हो गया।

कैसे मिली सटीक लोकेशन?

सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे ऑपरेशन अचानक नहीं होते, बल्कि वर्षों की खुफिया तैयारी का परिणाम (Khamenei Palace Strike) होते हैं। बताया जा रहा है कि:

मानव स्रोत (HUMINT): ईरान के सुरक्षा तंत्र के भीतर संभावित संपर्कों से जानकारी जुटाई गई।

सिग्नल इंटेलिजेंस (SIGINT): संचार नेटवर्क की निगरानी कर मीटिंग की टाइमिंग का अंदाजा लगाया गया।

सैटेलाइट इमेजरी: हाई-रिजोल्यूशन सैटेलाइट तस्वीरों से मूवमेंट की पुष्टि की गई।

साइबर टूल्स और AI विश्लेषण: डिजिटल गतिविधियों और डिवाइस ट्रैकिंग के जरिए लोकेशन को क्रॉस-चेक किया गया।

कुछ रिपोर्ट्स में यह भी दावा है कि सुरक्षा घेरे में मौजूद लोगों के फोन या संचार उपकरणों की ट्रैकिंग से मीटिंग की जानकारी मिली होगी।

‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ की चर्चा

अंतरराष्ट्रीय मीडिया में ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ नाम से एक संयुक्त अभियान का उल्लेख किया (Khamenei Palace Strike) जा रहा है, जिसमें इज़रायली और अमेरिकी एजेंसियों के सहयोग की बात कही गई है। हालांकि संबंधित सरकारों की ओर से विस्तृत आधिकारिक जानकारी सीमित है।

सुबह 9 बजे क्यों किया गया हमला?

रिपोर्ट्स के अनुसार, स्थानीय समयानुसार सुबह करीब 9 बजे हमला हुआ, जब बैठक अपने चरम पर थी। विश्लेषकों का मानना है कि दिन के समय कार्रवाई करना यह दर्शाता है कि हमलावर पक्ष को लक्ष्य और समय को लेकर उच्च स्तर का भरोसा था।

बढ़ता क्षेत्रीय तनाव

इस घटना के बाद ईरान और इज़रायल के बीच टकराव और तेज हो गया है। मिडिल ईस्ट के कई देशों में हाई अलर्ट है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय स्थिति पर नजर रखे हुए है, क्योंकि यह घटनाक्रम क्षेत्रीय शक्ति संतुलन पर दूरगामी असर डाल सकता है।