Naxal Commander Devji Surrender : माओवाद को बड़ा झटका, टॉप नक्सली कमांडर देवजी ने 18 साथियों संग किया सरेंडर, संगठन की कमर टूटने के संकेत

Naxal Commander Devji Surrender

Naxal Commander Devji Surrender

माओवादी संगठन के लिए एक बड़ा झटका तब लगा जब पोलित ब्यूरो सदस्य और शीर्ष नक्सली कमांडर देवजी ने अपने 18 साथियों के साथ तेलंगाना में आत्मसमर्पण (Naxal Commander Devji Surrender) कर दिया। लंबे समय से सुरक्षा बलों के लगातार बढ़ते दबाव और सघन अभियान के बीच इस सरेंडर को माओवादी नेटवर्क के लिए एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है।

जानकारी के अनुसार, देवजी संगठन के केंद्रीय नेतृत्व में शामिल वरिष्ठ कमांडरों में गिने जाते थे और उनकी भूमिका रणनीतिक स्तर पर महत्वपूर्ण मानी जाती थी। उनके आत्मसमर्पण से न केवल संगठन की संचालन क्षमता प्रभावित होने की संभावना है, बल्कि यह माओवादी ढांचे के भीतर बढ़ती कमजोरियों का भी संकेत माना जा रहा है।

सूत्रों के मुताबिक, सुरक्षा बलों द्वारा लगातार चलाए जा रहे ऑपरेशन, नक्सल नेटवर्क पर कार्रवाई और घेराबंदी के कारण संगठन के कई शीर्ष नेता दबाव (Naxal Commander Devji Surrender) में हैं। इसी क्रम में देवजी का सरेंडर संगठन के लिए मनोवैज्ञानिक और रणनीतिक दोनों दृष्टि से बड़ा झटका माना जा रहा है।

उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि बसव राजू के निष्प्रभावी होने के बाद देवजी संगठन के प्रमुख कमांडरों में शामिल थे। उन्होंने बताया कि देवजी ने तेलंगाना में आत्मसमर्पण किया है और अन्य सक्रिय नक्सलियों को भी मुख्यधारा से जोड़ने के प्रयास (Naxal Commander Devji Surrender) जारी हैं। सरकार द्वारा आत्मसमर्पण करने वालों के पुनर्वास, रोजगार और सामान्य जीवन से जुड़ने के लिए आवश्यक सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जा रही हैं।

हाल के समय में कई शीर्ष माओवादी नेताओं ने आत्मसमर्पण किया है, जिससे संगठन की पकड़ कमजोर होती दिखाई दे रही है। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि लगातार चल रहे अभियानों और पुनर्वास नीति के कारण कई नक्सली अब हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौटने का विकल्प चुन रहे हैं।

देवजी का आत्मसमर्पण नक्सल विरोधी अभियान में एक बड़ी सफलता के रूप में देखा जा रहा है, जिससे आने वाले समय में माओवादी गतिविधियों पर और प्रभावी नियंत्रण की उम्मीद जताई जा रही है।

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