Quit Smoking Cancer Study : तंबाकू छोड़ना बन सकता है जीवनरक्षक फैसला, सिगरेट छोड़ने से मुंह के कैंसर का खतरा 60% तक घटा, बड़े अध्ययन में खुलासा

Quit Smoking Cancer Study

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तंबाकू की आदत छोड़ना न केवल एक स्वस्थ जीवन की दिशा में कदम है, बल्कि यह मुंह के कैंसर जैसे गंभीर रोग के खतरे को भी काफी हद तक कम (Quit Smoking Cancer Study) कर सकता है। हाल ही में किए गए एक व्यापक अध्ययन में यह सामने आया है कि सिगरेट छोड़ने से मुंह के कैंसर का जोखिम 60 प्रतिशत से अधिक तक कम हो सकता है, जबकि तंबाकू चबाने की आदत छोड़ने से यह खतरा 42 प्रतिशत तक घट जाता है।

यह महत्वपूर्ण अध्ययन देश के प्रमुख कैंसर अनुसंधान संस्थान टाटा मेमोरियल सेंटर (टीएमसी) के कैंसर महामारी विज्ञान केंद्र द्वारा किया गया। शोध में वर्ष 2010 से 2022 के बीच मुंबई, नवी मुंबई, बारशी, वाराणसी और गुवाहाटी स्थित पांच कैंसर केंद्रों में आए 19 से 75 वर्ष आयु वर्ग के मरीजों के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया। अध्ययन का उद्देश्य यह समझना था कि तंबाकू छोड़ने के बाद कैंसर के खतरे में कितना बदलाव आता है।

शोध के निष्कर्षों के अनुसार, जो लोग लंबे समय तक सिगरेट पीने के बाद इसे छोड़ देते हैं, उनमें लगभग 10 वर्षों के भीतर मुंह के कैंसर का खतरा 61 प्रतिशत तक कम हो जाता है। इसी तरह, तंबाकू चबाने वालों में भी यह जोखिम 42 प्रतिशत तक घटता (Quit Smoking Cancer Study) देखा गया। हालांकि, यह खतरा पूरी तरह समाप्त नहीं होता और उन लोगों के स्तर तक नहीं पहुंचता, जिन्होंने कभी तंबाकू का सेवन नहीं किया।

विशेषज्ञों का कहना है कि यह निष्कर्ष उन लोगों के लिए उम्मीद की किरण है, जो वर्षों से तंबाकू का सेवन कर रहे हैं। तंबाकू छोड़ने से शरीर में होने वाली क्षति का प्रभाव धीरे-धीरे कम होने लगता है और कैंसर का जोखिम भी उल्लेखनीय रूप से घटता है। यह इस बात का स्पष्ट संकेत है कि तंबाकू छोड़ना किसी भी उम्र में फायदेमंद हो सकता है।

टीएमसी की अनुसंधान इकाई एडवांस्ड सेंटर फॉर ट्रीटमेंट रिसर्च एंड एजुकेशन इन कैंसर (ACTREC) के निदेशक डॉ. पंकज चतुर्वेदी ने बताया कि भारत में होने वाले लगभग 20 से 25 प्रतिशत कैंसर सीधे तौर पर मुंह के कैंसर से जुड़े होते हैं, जिनका मुख्य कारण तंबाकू का सेवन है। इसके अलावा मूत्राशय, किडनी और अग्नाशय जैसे अन्य कैंसरों के मामलों में भी तंबाकू एक प्रमुख जोखिम कारक है।

अध्ययन में यह भी सामने आया कि सुपारी के साथ तंबाकू चबाने से मुंह के कैंसर का खतरा लगभग दोगुना तक बढ़ जाता है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि इस प्रकार की मिश्रित आदतें कैंसर के खतरे को और अधिक गंभीर बना देती हैं। हालांकि, अच्छी बात यह है कि तंबाकू छोड़ने से यह जोखिम धीरे-धीरे कम होने लगता है और शरीर में सुधार की प्रक्रिया शुरू हो जाती है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि तंबाकू से दूरी बनाना कैंसर की रोकथाम का सबसे प्रभावी उपाय है। यह न केवल कैंसर के खतरे को कम (Quit Smoking Cancer Study) करता है, बल्कि समग्र स्वास्थ्य और जीवन गुणवत्ता को भी बेहतर बनाता है। इस अध्ययन ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि तंबाकू छोड़ना एक ऐसा निर्णय है, जो लंबे समय में जीवन को सुरक्षित और स्वस्थ बना सकता है।

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